प्रकृति से कौन लड़ेगा।माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । Prakriti se kaun ladega.

कोई कहता है किसी भी प्रकार निराशा की बात मत करो। यह सोचना ही गलत है की वास्तविक सत्य निराशा का कारण हो सकता है। Prakriti se kaun ladega. आज तक प्रकृति से कौन जीत पाया है। संसार के हर प्राणी प्रकृति के आधीन है और प्रकृति के परवश हुआ कर्म किया करते हैं।प्रकृति से … Continue reading प्रकृति से कौन लड़ेगा।माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । Prakriti se kaun ladega.

प्रकृति जीव का माता। Jivan ka Aadhar prakriti.

संसार में भारत की संस्कृति अपने आप में बेहद ही खास और महत्वपूर्ण है। यहां हम चिंतन करेंगे ,प्रकृति जीव का माता कैसे? सनातन धर्म वाले प्रकृति को अपनी माता मानते हैं। हर भारतवासी भारत देश को भारत माता कह कर पुकारते हैं। हर भारतवासी भारतीय भूमि को जन्मभूमि मानते हैं। जिस पृथ्वी पर इतना … Continue reading प्रकृति जीव का माता। Jivan ka Aadhar prakriti.

प्रकृति का नि: शब्द संदेश। Prakriti ka awaaz.

प्रकृति का नि: शब्द संदेश। प्रकृति हमसे क्या चाहता है। आज का विशेष विचार। विश्व में प्रकृति का नि: शब्द संदेश। प्रकृति ने जन्म से ही व्यक्ति को बहुत कुछ दिया हुआ है। उसके बावजूद भी व्यक्ति संसार में और भी जो कुछ देखता है सबका तमन्ना कर लेता है। वास्तव में व्यक्ति को परमेश्वर … Continue reading प्रकृति का नि: शब्द संदेश। Prakriti ka awaaz.

प्रकृति मानव से प्रेम नहीं खोजता? Prakriti ka prakriti.

क्या प्रकृति हम से प्रेम नहीं खोजता? सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन। क्या यह विशाल प्रकृति हम मानव से प्रेम नहीं खोजता?सभी को पता है संसार में प्रकृति है तो हम सब हैं और यदि प्रकृति नहीं तो हम सब भी नहीं। एक पेड़ की बात करें तो पेड़ को हमसे क्या … Continue reading प्रकृति मानव से प्रेम नहीं खोजता? Prakriti ka prakriti.

भावना प्रकृति है। Prakriti mein Bhavna sabse khas hai.

जीव के अंदर भावना परमेश्वर की खास क्रिएशन है। हिंदू धर्म। सनातन धर्म। भावना प्राकृतिक है और परमेश्वर का विशेष निर्माण है।धरती पर सभीं जीव भावना युक्त से बने रहते हैं, जीव के ऊपर भावनाएं हावी रहता है। यह सिर्फ मानव में मौजूद नहीं, धरती पर अनेकों ऐसे जीव है जिन्हें हम करीब से देखें … Continue reading भावना प्रकृति है। Prakriti mein Bhavna sabse khas hai.

प्रकृति से खिलवाड़ क्यों? Prakriti se sab ka jivan hai.

प्रकृति के विपरीत कोई कैसे सोच सकता है, प्रकृति की देन मानव है, मानव ने प्रकृति नहीं बनाया। प्रकृति ने हमें जन्म दिया है फिर प्रकृति से खिलवाड़ क्यों? आज के मानव को प्रकृति के विपरीत मौसम चाहिए। विज्ञान इतना तरक्की कर चुका है की कहते हैं हम सब चांद पर पहुंच गए। हजारों साल … Continue reading प्रकृति से खिलवाड़ क्यों? Prakriti se sab ka jivan hai.