प्रेम का लड्डू जीवन का तबाह। Pyar mein mein Dhokha.

सनातन सत्य वास्तविकता को बयां करने की कोशिश करता है। एक मानव का उम्र के अनुसार संसार को देखने का नजरिया रोज बदलता है। दुनिया को देखने का बचपन में अलग अंदाज होता है। जवानी में उसे दुनिया अलग दिखता है। बुढ़ापे में दुनिया को वह अलग पाता है। कभी वह जीवन में जिस प्रेम … Continue reading प्रेम का लड्डू जीवन का तबाह। Pyar mein mein Dhokha.

अपना वास्तविक मित्र!विद्या मित्रं प्रवासेषु। Mitra ki paribhasha.

मित्रता के बारे में समझने के लिए यह समझना आवश्यक है , मित्र कौन और मित्र किसका? मित्र के प्रकार अनेक है। जो हमारे लिए भला सोचे, आवश्यकतानुसार उत्तम साथ दें है, उसे मित्र कहेंगे। मित्र के लिए वेद में एक प्रचलित श्लोक हैं। अपना वास्तविक मित्र!विद्या मित्रं प्रवासेषु। Mitra ki paribhasha.sanatansaty ।।विद्या मित्रं प्रवासेषु … Continue reading अपना वास्तविक मित्र!विद्या मित्रं प्रवासेषु। Mitra ki paribhasha.

सबसे बड़ा रुपैया। रुपए के रंग हजार। Baap bada na bhaiya. Paise ki takat.

कहते हैं इंसान नहीं बदलता पैसा बदल देता है। व्यक्ति को धन का चाहत अंधा बना देता है। सत्य की बात अनेक होता है ,परंतु जब धन की बात आता है तो सत्य का सुई मानो रुक जाता हो।पूर्व काल से एक मशहूर कहावत चला आ रहा है। "बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया।" … Continue reading सबसे बड़ा रुपैया। रुपए के रंग हजार। Baap bada na bhaiya. Paise ki takat.

प्रेम न बाड़ी ऊपजै। प्रेम अमूल्य है, प्रेम का कीमत सिर्फ प्रेम है। Prem ka kimat sirf Prem hai.

श्री कबीर दास जी को आज संसार में कौन नहीं जानता। संसार की वास्तविकता को अपने दोहे के जरिए प्रस्तुत करने वाले कबीर दास जी भारत में अतुल्य संत में जाते हैं। बहुत लंबे चौड़े भाषण के बजाय वह हर बात को दोहे में कहते रहे। कबीर दास जी के दोहे को समाज में बहुत … Continue reading प्रेम न बाड़ी ऊपजै। प्रेम अमूल्य है, प्रेम का कीमत सिर्फ प्रेम है। Prem ka kimat sirf Prem hai.

वृद्धावस्था जीवन का सबसे बड़ा रोग।Budhapa sab Ko aane wala ek Rog.

इस धरती पर एक रोग ,जो जीवन के जो साथ में आता है ! वह है वृद्धावस्था! कोई बुढ़ापा भी कहता है। यह रोग इतना बड़ा है की प्राचीन काल से इससे लड़ने के लिए अनेकों प्रकार के कोशिश किए गए। आज भी लोग यही सोचते हैं क्या करें कि जीवन का सबसे बड़ा रोग … Continue reading वृद्धावस्था जीवन का सबसे बड़ा रोग।Budhapa sab Ko aane wala ek Rog.

जीवन में आशा का अंत। Manav jivan mein Chahat.

प्रकृति प्रेम यात्रा की- मानव जीवन में कुछ पाने की आशा। हिंदू धर्म में जीवन। क्या मानव जीवन में पनपने वाले आशा का अंत हो सकता है।एक बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से उस बच्चे के अंदर एक आशा का बनना शुरू हो जाता है,'' आशा कौन सी आशा!''कुछ पाने की आशा कुछ … Continue reading जीवन में आशा का अंत। Manav jivan mein Chahat.

माता पिता दोषी क्यों? Man baap ki ki Kaun sune.

मां बाप हीं गुनहगार क्यों। माता-पिता को दोषी ठहराया जा सकता है। सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन। सब करने के बाद माता पिता बच्चे के लिए दोषी क्यों?माता पिता अपने बच्चों से विशेष क्या उम्मींद करते हैं। क्या वे ऐसा चाहते हैं कि बच्चे अपनी सारी खुशियां त्याग दें, अथवा बच्चे जीना … Continue reading माता पिता दोषी क्यों? Man baap ki ki Kaun sune.

प्रेम का हकदार कौन? Pagalpan aur Prem Yatra.

प्रेम एवं पागलपन की यात्रा किसके लिए है? प्रेम का वास्तविक हकदार कौन? सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम दर्शन। प्रेम यात्रा किसके लिए और प्रेम का वास्तविक हकदार कौन?एक पुरानी कहावत है "इश्क नहीं आसान इतना एक आग का दरिया है और डूब कर जाना है।"निश्चित तौर पर इस एक आग का दरिया है … Continue reading प्रेम का हकदार कौन? Pagalpan aur Prem Yatra.

प्रेम और सम्मान का तुलना स्वर्ग से कैसे हो सकता है?

प्रकृति प्रेम यात्रा की-०८ स्वर्ग और नर्क क्या होता है? प्रेम और सम्मान स्वर्ग कैसे हो सकता है? हिंदू और सनातन धर्म में प्रेम एक दर्शन। प्रेम और सम्मान का तुलना स्वर्ग से कैसे हो सकता है?सम्मान प्रेम का ही दूसरा रूप है। जब व्यक्ति के लिए किसी दूसरे के अंदर प्रेम जागृत होता है … Continue reading प्रेम और सम्मान का तुलना स्वर्ग से कैसे हो सकता है?

औरत ही हर बार क्यों सुनें। Aurat Apne khushiyon ka tyag kyon Karen.

हर बार हर जगह सिर्फ औरत ही क्यों सुने? सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन। औरत ही हर जगह हर बार अकेली क्यों सुनें?सामाजिक व्यवस्था में नारी का स्थान कहां है यह सभी को पता है। चर्चा तो बहुत होता है परंतु पुरुष प्रधानता की वजह से नारी के ऊपर जो ध्यान होना … Continue reading औरत ही हर बार क्यों सुनें। Aurat Apne khushiyon ka tyag kyon Karen.

प्रेमी को प्रेम और प्रेम को क्या चाहिए? Lover ko love chahie.

व्यक्ति को प्रेम चाहिए और प्रेम को क्या चाहिए? हिंदू और सनातन धर्म में प्रेम एक दर्शन। प्रेम की परिभाषा का कोई सीमा नहीं हो सकता। किसी व्यक्ति को प्रेम चाहिए और प्रेम को क्या चाहिए। प्रेमी को प्रेम चाहिए और प्रेम को क्या चाहिए?हर कला कहता है मुझसे प्रेम करो। हर कला कहता है … Continue reading प्रेमी को प्रेम और प्रेम को क्या चाहिए? Lover ko love chahie.

प्रकृति मानव से प्रेम नहीं खोजता? Prakriti ka prakriti.

क्या प्रकृति हम से प्रेम नहीं खोजता? सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन। क्या यह विशाल प्रकृति हम मानव से प्रेम नहीं खोजता?सभी को पता है संसार में प्रकृति है तो हम सब हैं और यदि प्रकृति नहीं तो हम सब भी नहीं। एक पेड़ की बात करें तो पेड़ को हमसे क्या … Continue reading प्रकृति मानव से प्रेम नहीं खोजता? Prakriti ka prakriti.

माता का दिल और प्रेम। Maa ke Prem ki paribhasha.

माता के प्रेम का आधार क्या होता है? सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन। माता के प्रेम का वास्तविक परिभाषा क्या है?एक माता के प्रेम को तौलना मूर्खता होगा। क्योंकि संसार में एक मां ही है जो अपनी खुशी को बच्चे का खुशी समझती है। निश्चित तौर पर मां की आशाएं होती है। … Continue reading माता का दिल और प्रेम। Maa ke Prem ki paribhasha.

दुनिया में सबको प्रेम चाहिए। Sansar mein sab Prem ke bhukhe Hain.

कौन है जिसे प्रेम नहीं चाहिए? हिंदू और सनातन धर्म में प्रेम एक दर्शन। संसार में कौन है जिसको प्रेम नहीं चाहिए?कहते हैं धरती पर यदि सबसे कोई खतरनाक जीव है तो वह है मानव! एक शेर हिरण का शिकार करता है क्यों? क्योंकि वह घास नहीं खा सकता। मानव अपने स्वार्थ सिद्ध करने के … Continue reading दुनिया में सबको प्रेम चाहिए। Sansar mein sab Prem ke bhukhe Hain.

प्रेम को अपने लिए क्या चाहिए।

प्रकृति प्रेम यात्रा की- ०२, प्रेम सदैव के लिए त्याग खोजता है। सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन। प्रेम को अपने लिए क्या चाहिए।इस प्रकृति में शायद ही ऐसा कोई जीव है जो प्रेम नहीं करता। प्रेम को क्या चाहिए, प्रेम को सिर्फ प्रेम चाहिए। यदि करीब से देखें तो एक मानव कितने … Continue reading प्रेम को अपने लिए क्या चाहिए।

प्रेम की वास्तविक परिभाषा क्या है? Prem ki paribhasha.

प्रेम की परिभाषा। सनातन धर्म में प्रेम दर्शन। प्रेम के लिए हिंदू धर्म क्या कहता है। प्रेम की वास्तविक परिभाषा क्या है?प्रेम वहां से शुरू होता है, जहां बुद्धि अपना कार्य छोड़ देता है। इसीलिए इतिहास में अनेक महामानव यह बात दर्शा कर गए, प्रेम तो संसार में परम पवित्र तत्व है। सांसारिक दृष्टि से … Continue reading प्रेम की वास्तविक परिभाषा क्या है? Prem ki paribhasha.

प्रेम की वास्तविकता क्या है? प्रेम में समर्पण।Saccha Prem aur jhuta Prem.

प्रेम और फ्रेम में क्या अंतर है? हिंदू धर्म में प्रेम की वास्तविकता। सनातन धर्म में प्रेम। सच्चा प्रेम और झूठा प्रेम की वास्तविकता क्या है?प्रेम तो वह है जिसमें व्यक्ति प्रेम के चक्कर में अपने स्वार्थ को भूल जाता है। प्रेम रूपी फ्रेम वह है जो बनाया हुआ है, जो महज प्रेम का ढांचा … Continue reading प्रेम की वास्तविकता क्या है? प्रेम में समर्पण।Saccha Prem aur jhuta Prem.

पैसा फेक तमाशा देख। Paisa fek Tamasha dekh.

पैसा फेक तमाशा देख! सत्य सदैव सत्य है फिर भी समाज का सत्य पैसा है। हिंदू धर्म। सनातन धर्म। पैसा फेक तमाशा देख ! जब व्यक्ति को किसी प्रकार दिल को ठेस पहुंचता है तो उसे बहुत किस्म के बातें सामने आने लगता है। ' ''दुनियासत्य पर चलता है, दु:ख का बदला दु:ख से, अधर्म … Continue reading पैसा फेक तमाशा देख। Paisa fek Tamasha dekh.

ईश्वर की भक्ति क्यों।Bhagwan aur bhagt ka prem

परमेश्वर ने हमें कुछ नहीं दिया, हम परमेश्वर को क्यों याद करें? हिंदू धर्म। सनातन धर्म। क्या भगवान ने कुछ नहीं दिया तो भगवान की भक्ति नहीं करना चाहिए। परमेश्वर ने हमें कुछ नहीं दिया इसलिए हम उस परमेश्वर को क्यों याद करें? ऐसा कहने वाले की भी संख्या कम नहीं है। इस प्रकार कहने … Continue reading ईश्वर की भक्ति क्यों।Bhagwan aur bhagt ka prem

प्रेमी का भावना महत्वपूर्ण क्यों। Premi ka Dil kya sochta hai.

प्रेम में साथी की भावना महत्वपूर्ण होता है। हिंदू धर्म। सनातन धर्म। प्रेम में अपने प्रेमी साथी का भावना महत्वपूर्ण क्यों।प्रेम का शुरुआत, आकर्षण अपने प्रेमी के बारे में महान दर्शन सहायक होता है। ऐसी स्थिति में आकर्षण और दर्शन यदि वास्तविक ना हो तो प्रेम का स्थिति नीचे आ जाता है। इसीलिए कहते हैं … Continue reading प्रेमी का भावना महत्वपूर्ण क्यों। Premi ka Dil kya sochta hai.

प्रेम किससे और क्यों? Vastvik Prem kaise ho.

प्रेम कैसे करें और प्रेम किससे करें? हिंदू धर्म। सनातन धर्म।प्रेम की परिभाषा। प्रेम किससे करें और प्रेम कैसे करें?प्रेम कैसे करें, इसे समझने के लिए सर्वप्रथम  प्रेम को समझना होगा। प्रेम क्या है और यह कैसे काम करता है। वास्तविक प्रेम कभी किसी का गुलाम नहीं हो सकता। गुलाम अर्थात मजबूरी में किया गया … Continue reading प्रेम किससे और क्यों? Vastvik Prem kaise ho.

मानव जीवन में रिश्ते की जरूरत क्या? Parivar aur rishtedari.

रिश्ते क्यों जरूरी है। सब मिलकर एक साथ कैसे रहे। सनातन धर्म। हिंदू। परिवार के लिए आपसी रिश्ते की जरूरत क्यों?रिश्ते क्यों जरूरी है। क्योंकि व्यक्ति के लिए संसार जरूरी है। संसार के लिए समाज जरूरी है और समाज के लिए भावना जरूरी है। किसी व्यक्ति को निर्जन प्रदेश का राजा घोषित कर दिया जाए, … Continue reading मानव जीवन में रिश्ते की जरूरत क्या? Parivar aur rishtedari.

प्रेम की ताकत। Prem kya kar sakta hai.

प्रेम तो परमेश्वर को झुका देता है, फिर प्रकृति की क्या विशाद। हट पूर्वक बलपूर्वक प्रेम कभी हासिल नहीं किया जा सकता, यदि समर्पण हो तो प्रेमी को झुकना पड़ेगा।प्रेम की ताकत भगवान को भी झुका देता है।इस झुकाव का सत्यता सबको पता है, हम सब स्वयं ही प्रकृति के प्रति झुके हुए हैं, सभी … Continue reading प्रेम की ताकत। Prem kya kar sakta hai.

टूटा हुआ दिल बेचारा क्या करें।Dil Ko Kaun samjhaye/

प्रेमी के द्वारा टूटे हुए दिल को कैसे समझाएं? टूटे हुए दिल के लिए क्या कहें, इस दुनिया में एक दिल ही तो है जो कहते हैं मानता नहीं! दिल को हर समय कुछ न कुछ चाहिए, दोस्तों से तो चाहिए साथ में दुश्मनों से भी चाहिए। आखिर टूटे दिल को कौन समझाए। एक मशहूर … Continue reading टूटा हुआ दिल बेचारा क्या करें।Dil Ko Kaun samjhaye/

मानवता में रिश्ता का महत्व । Sansar mein rishta kaise banaa.

रिश्ता क्यों जरूरी है? दुनिया में रिश्ता किसने बनाया ,क्यों बनाया ,किस लिए बनाया ? जिंदगी में रिश्ता क्या महत्व रखता है? मानवता में रिश्ता का क्या महत्व है?मानवता के लिए आपसी रिश्ते की क्यों जरूरत है?व्यक्ति के अंदर एक महत्वपूर्ण तत्व है और वह है भावना। इतिहास कहता है कि इंसान के अंदर यदि … Continue reading मानवता में रिश्ता का महत्व । Sansar mein rishta kaise banaa.

प्रेमी का प्रेम कैसे मिले? Dil ki baat kaise samjhaye.

हमारे अपनी हम से प्रेम कैसे करें। अपने प्रेमी का प्रेम कैसे पाएं?क्या बलपूर्वक प्रेम को पाना संभव है? नहीं कभी नहीं! प्रेम के अंदर यदि समर्पण ना हो तो वो प्रेम कभी नहीं हो सकता। प्रेम के अंदर यदि आशा अथवा किसी प्रकार का स्वार्थ हो तो वह भी प्रेम नहीं हो सकता। वैसा … Continue reading प्रेमी का प्रेम कैसे मिले? Dil ki baat kaise samjhaye.

संसार में मानव एवं मानव का चाहत। Manav ka Chahat kab pura hoga.

क्या मानव का चाहत कभी पूरा होगा। इच्छा के ऊपर सनातन धर्म और हिंदू धर्म क्या कहता है।‌‌     संसार में क्या मानव का चाहत कभी पूरा होता है? कहते हैं सोच की कोई सीमा नहीं होता, कुछ भी सोच लो। कुछ भी सोचने के लिए कोई रोकने वाला नहीं है, कल्पनाओं की दुनिया, सबकी अपनी … Continue reading संसार में मानव एवं मानव का चाहत। Manav ka Chahat kab pura hoga.