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यह वेबसाइट जिंदगी से जुड़े हर प्रकार के प्रश्न एवं उलझनों का वास्तविकता से समाधान देने की कोशिश करता है। वक्ता का यह मानना है ,जीवन में हर प्रकार का उपलब्धि कर्मों के उत्तम प्रयास से होता है। उत्तम प्रयास मानसिक स्थिरता एवं दृढ़ता से होता है। स्थिति को ना समझने के कारण व्यक्ति बहुत बार चूक जाता है।

समय है जो निरंतर चलता है, हमारे पहले भी दुनिया था और हमारे बाद भी दुनिया रहेगा। समाज को हम नहीं बदल सकते, समाज के अनुसार हमें स्वयं को बदलना होगा। समाज समूह है और हम एक व्यक्ति। व्यक्ति अपने आप को समझा सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सर्वप्रथम स्वयं को केंद्र करना होगा। सभीं के दिल के अंदर कुछ दर्द है, और सभीं दर्द को साथ लेकर जीने की कोशिश करते हैं। किसी भी उलझन से कोई तीसरा नहीं निकाल सकता। वास्तव में किसी भी तीसरे को आपके मूल स्थिति का ज्ञान नहीं हो सकता। आप की स्थिति को स्वयं आप समझते हैं। परिस्थिति से निकलने का मार्ग भी आपके द्वारा ही निकलेगा। यदि आपके पास हौसला एवं जुनून हैं तो निश्चित तौर पर अपने विपरीत परिस्थिति को अनुकूल कर‌ सकते हैं। जीवन में विश्वास उम्र को बढ़ाता है, जीवन में अविश्वास शरीर को अस्वस्थ बनाता है। कुछ बातें विपरीत सा प्रतीत हो सकता है परंतु उसका भविष्य परिणाम अनुकूल होगा। प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं का प्रयास करना होगा। हम स्वयं से स्वयं के भाव को बदल सकते हैं, परंतु दूसरे के भाव में किसी प्रकार भी परिवर्तन नहीं ला सकते। अपने भावना का निर्माता व्यक्ति स्वयं होता है। सुख और दुख का न्योता भी व्यक्ति स्वयं ही देता है। यदि चाहत उचित हो तो जीने में आनंद आएगा। परंतु यह भी सत्य है-चाहत एक भंवर जाल है, जिसे व्यक्ति स्वयं प्रतिदिन कड़ी मेहनत करके बुनता है। व्यक्ति को जाल बुनने का अधिकार है, लेकिन उसे तोड़ने का अधिकार केवल प्रकृति को है।प्रकृति का ऐसा विधान है कि कोई अपने कर्म फल को दूसरे को हस्तांतरित नहीं कर सकता।

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सबको पता है सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है,फिर भी वास्तव में दृश्य रूप से समाज का ईश्वर पैसा है। सबको पता है सत्य से हीं दुनिया चल रही है। जो बना है वह  टूटेगा। कहते हैं परमेश्वर अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेता, और यह सत्य है, परमेश्वर अपने से न तो किसी को कुछ देता है और न ही किसी का कुछ लेता है, यह संसार अपने प्रकृति का गुलाम है। अपने कर्म का गुलाम है, कर्म फल का गुलाम  है। कोई कहता है ”परमेश्वर के सामने जाओ हाथ जोड़ लो, उसकी बंदगी कर लो, वो ईश्वर बहुत ही रहम दिल वाला है सब माफ कर  देगा।”  वास्तव में परमेश्वर के पास कोई दिल नहीं है, उसके प्रकृति के पास दिल है, जो इस प्रकृति को जो भी देता है जैसे देता है, यह प्रकृति उसे वैसे हीं लौटा देता है।

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