“सनातन सत्य” सनातन प्रेमियों एवं चिंतकों का हार्दिक अभिनंदन एवं ईश्वर स्वरूपांश नमन करता है।

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अतुल्य संस्कृति का बेजोड़ संगम। An unmatched confluence of incredible culture.

सबको पता है सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है,फिर भी वास्तव में दृश्य रूप से समाज का ईश्वर पैसा है। सबको पता है सत्य से हीं दुनिया चल रही है। जो बना है वह  टूटेगा। कहते हैं परमेश्वर अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेता, और यह सत्य है, परमेश्वर अपने से न तो किसी को कुछ देता है और न ही किसी का कुछ लेता है, यह संसार अपने प्रकृति का गुलाम है। अपने कर्म का गुलाम है, कर्म फल का गुलाम  है। कोई कहता है ”परमेश्वर के सामने जाओ हाथ जोड़ लो, उसकी बंदगी कर लो, वो ईश्वर बहुत ही रहम दिल वाला है सब माफ कर  देगा।”  वास्तव में परमेश्वर के पास कोई दिल नहीं है, उसके प्रकृति के पास दिल है, जो इस प्रकृति को जो भी देता है जैसे देता है, यह प्रकृति उसे वैसे हीं लौटा देता है।

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“Sanatan Satya” salutes God for all Sanatan nobles.

Everyone knows the truth is God and God is the truth, yet in reality the God of society is money. Everyone knows that the world is moving with the truth. What is made will be broken. It is said that God does not take any blame on himself, and this is true, God neither gives anything to anyone nor takes anything from anyone, this world is a slave to his nature. A slave of his karma, a slave of karma. Someone says, “Go in front of God, fold your hands, hold him down, that God is very merciful and will forgive all.” In fact God has no heart, his nature has a heart Whoever gives this nature as he gives, this nature returns it as it is.

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