सनातन धर्म में तपस्या का महत्व किसी से छुपा नहीं है। महान महात्माओं तथा भक्तों के त्याग में सिद्ध स्थल का निर्माण होता है।

ईश्वर सर्वत्र समान रूप से विराजमान है ,फिर भी तपस्या किसी भूमि को विशेष सिद्ध स्थल में निर्माण कर देता है।

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर। Dehradun siddh sthal.

पावन देवभूमि उत्तराखंड के तप नगरी देहरादून के निकट प्रमुख सिद्ध स्थलों में से एक “श्री लक्ष्मण सिद्ध मंदिर।”

प्रसिद्ध है त्रेता युग में जब महर्षि श्री अत्री व माता अनुसूया के तप की परीक्षा लेने हेतु जब त्रिदेव पृथ्वी लोक पर आएं, उस समय त्रिदेवों नें माता अनुसूया के तपस्या से प्रसन्न होकर उनकें गर्भ से एक बालक के रूप में जन्म लिया। वह बालक जिनका नाम श्री दत्तात्रेय पड़ा।

आगे चलकर भगवान श्री दत्तात्रेय नें जन कल्याण हेतु 84 शिष्य बनाएं ।

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर। Dehradun siddh sthal.

वर्तमान में 84 सिद्ध पीठों के नाम से जाने जाते हैं। जिसमें लक्ष्मण सिद्ध मंदिर भी एक है। मान्यता है की जब रामचंद्र जी एवं लक्ष्मण जी! रावण से युद्ध के उपरांत अयोध्या आए उस समय ब्राह्मणों के निर्देश से ब्रह्म-हत्या दोष निवारण के लिए कठोर तप की।

लक्ष्मण जी ने वह तपस्या देहरादून के इसी स्थान पर की थी।

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर। Dehradun siddh sthal.

इसलिए इस स्थल को लक्ष्मण सिद्ध के नाम से जाना जाता है। यह प्रसिद्ध है कि यहां पर सच्चे मन से मांगी हर इच्छा पूर्ण होता है।

यह स्थान सनातन धर्म में सभीं भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

यहां प्रत्येक रविवार को मेला लगता है तथा प्रत्येक वर्ष के अप्रैल माह के अंतिम रविवार को विशेष मेला व भंडारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से व्यक्ति भगवान के इस सिद्ध स्थल के दर्शन हेतु आते हैं।

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