श्री रामचरित्रमानस सनातन साहित्य में क्या महत्व रखता है, इससे सभीं परिचित हैं। श्री रामचंद्र स्वयं ही ब्रह्मांड को बनाने वाले कहे जाते हैं। ईश्वर की महिमा अपरंपार है। कहते हैं ईश्वर ने मनुष्य की रचना कर अपनी समस्त शक्तियों को मनुष्य के अंदर डाल दिया। मनुष्य है ,जो सभीं शक्तियों के होने के बाद भी वह अनजान है। पूर्व में जो महामानव हुए वे सभीं मनुष्य हीं रहे। उनमें सबसे खास था उन्होंने अपने शक्तियों को समझा।

संसार में ऐसे भी कुछ प्रतिशत व्यक्ति हैं जिन्हें ईश्वर पर भरोसा नहीं होता।

ईश्वर है और यह सत्य है। ईश्वर का नाम लेने वाला, ईश्वर की भक्ति करने वाला, ईश्वर के ऊपर अथाह भरोसा रखने वाला, आज ईश्वर के सदृश्य पूजा जाता है। या यूं कह सकते हैं कि वह समाज के अंदर ईश्वर के सदृश्य सम्मान पाता है।

उस परम शक्ति ईश्वर का जिस किसी ने दिल से गुणगान किया, आज सभीं उसका गुणगान करते हैं।

मनोकामना पूर्ति चौपाई मंत्र। श्री रामचरित्रमानस। Icchapurti chaupai

ईश्वर इतना महान है कि ईश्वर के बारे में जो कुछ कहा जाए वह सभीं महामंत्र हो जाता है।मनोकामना पूर्ति चौपाई मंत्र।
श्री रामचरित्रमानस समाज के अंदर जितना प्रचलित है, वैसे ही इनके अंदर प्रचलित चौपाई है। वैसे मैंने कहा कि ईश्वर के लिए जिस शब्द का प्रयोग हो वह सभीं मंत्र है। इस दृष्टि से श्री रामचरित्रमानस का हर शब्द अपने आप में एक पूर्ण मंत्र है। उन्हीं मंत्रों में से कुछ मंत्र ऐसे हैं ,जिसे खास प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाता है।

मंत्र स्वयं ही ईश्वर स्वरूप है, परंतु यदि भावना ना हो तो ईश्वर सामने रहकर भी दिखाई नहीं देता।

वैसे ही यदि मंत्र के अंदर विश्वास रूपी भावना ना हो तो मंत्र का शक्ति नहीं दिखता। जिस राम का जिक्र किया जाता है श्री रामचरित्रमानस में वह राम! राम से पहले भी था और वह इससे अलग भी है। राम चरित्र मानस ऐसे ही महान नहीं कहा जाता, श्री रामचरित्रमानस में महान ईश्वर का नाम है। श्री रामचरित्रमानस में प्रकृति के स्वामी परमेश्वर का गुणगान है। ईश्वर सदैव ही अपनी महानता को लेकर प्रसिद्ध है।

उसी ईश्वर की गुणगान लिए रामचरित्र मानस की अपनी शक्ति है। रामचरित्रमानस की चौपाइयों में अविश्वसनीय शक्ति मौजूद है। समाज में प्रचलित विशेष प्रयोजन में लाए जाने वाले कुछ विशेष चौपाई का यहां उल्लेख है। यह सभीं चौपाई भक्तों के जीवन में मार्गदर्शन करें।

रक्षा के लिए
मामभिरक्षक रघुकुल नायक |
घृत वर चाप रुचिर कर सायक ||

विपत्ति दूर करने के लिए
राजिव नयन धरे धनु सायक |
भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक ||

सहायता के लिए
मोरे हित हरि सम नहि कोऊ |
एहि अवसर सहाय सोई होऊ ||

सब काम बनाने के लिए
वंदौ बाल रुप सोई रामू |
सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू ||

वश मे करने के लिए
सुमिर पवन सुत पावन नामू |
अपने वश कर राखे राम ||

संकट से बचने के लिए
दीन दयालु विरद संभारी |
हरहु नाथ मम संकट भारी ||

विघ्न विनाश के लिए
सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही |
राम सुकृपा बिलोकहि जेहि ||

रोग विनाश के लिए
राम कृपा नाशहि सव रोगा |
जो यहि भाँति बनहि संयोगा ||

बुखार दूर करने के लिए
दैहिक दैविक भोतिक तापा |
राम राज्य नहि काहुहि व्यापा ||

दुःख नाश के लिए
राम भक्ति मणि उर बस जाके |
दुःख लवलेस न सपनेहु ताके ||

खोई चीज पाने के लिए
गई बहोरि गरीब नेवाजू |
सरल सबल साहिब रघुराजू ||

अनुराग बढाने के लिए
सीता राम चरण रत मोरे |
अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे ||

घर मे सुख लाने के लिए
जै सकाम नर सुनहि जे गावहि |
सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं ||

सुधार करने के लिए
मोहि सुधारहि सोई सब भाँती |
जासु कृपा नहि कृपा अघाती ||

विद्या पाने के लिए
गुरू गृह पढन गए रघुराई |
अल्प काल विधा सब आई ||

सरस्वती निवास के लिए
जेहि पर कृपा करहि जन जानी |
कवि उर अजिर नचावहि बानी ||

निर्मल बुद्धि के लिए
ताके युग पदं कमल मनाऊँ |
जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ ||

मोह नाश के लिए
होय विवेक मोह भ्रम भागा |
तब रघुनाथ चरण अनुरागा ||

प्रेम बढाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती |
चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती ||

प्रीति बढाने के लिए
बैर न कर काह सन कोई |
जासन बैर प्रीति कर सोई ||

सुख प्रप्ति के लिए
अनुजन संयुत भोजन करही |
देखि सकल जननी सुख भरहीं ||

भाई का प्रेम पाने के लिए
सेवाहि सानुकूल सब भाई |
राम चरण रति अति अधिकाई ||

बैर दूर करने के लिए
बैर न कर काहू सन कोई |
राम प्रताप विषमता खोई ||

मेल कराने के लिए
गरल सुधा रिपु करही मिलाई |
गोपद सिंधु अनल सितलाई ||

शत्रु नाश के लिए
जाके सुमिरन ते रिपु नासा |
नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा ||

रोजगार पाने के लिए
विश्व भरण पोषण करि जोई |
ताकर नाम भरत अस होई ||

इच्छा पूरी करने के लिए
राम सदा सेवक रूचि राखी |
वेद पुराण साधु सुर साखी ||

पाप विनाश के लिए
पापी जाकर नाम सुमिरहीं |
अति अपार भव भवसागर तरहीं ||

अल्प मृत्यु न होने के लिए
अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा |
सब सुन्दर सब निरूज शरीरा ||

दरिद्रता दूर के लिए
नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना |
नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना ||

प्रभु दर्शन पाने के लिए
अतिशय प्रीति देख रघुवीरा |
प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा ||

शोक दूर करने के लिए
नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी |
आए जन्म फल होहिं विशोकी ||

क्षमा माँगने के लिए
अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता |
क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता ||

सभी प्रकार की कृपा के लिये
सीता राम चरण रति मोरे |
अनुदीन बरहूं अनुग्रह तोरे ||

सनातन सत्य समाज के हर वर्ग और धर्म के लोगों के कल्याण की कामना करता है। सभीं पाठक प्रेमियों को हार्दिक शुभेच्छा एवं धन्यवाद!

4 thoughts on “मनोकामना पूर्ति चौपाई मंत्र। श्री रामचरित्रमानस। Icchapurti chaupai

  1. दीन दयालु विरद संभारी |
    हरहु नाथ मम संकट भारी ||
    spent my childhood reciting it

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