सनातन सत्य वास्तविकता को बयां करने की कोशिश करता है। एक मानव का उम्र के अनुसार संसार को देखने का नजरिया रोज बदलता है। दुनिया को देखने का बचपन में अलग अंदाज होता है। जवानी में उसे दुनिया अलग दिखता है। बुढ़ापे में दुनिया को वह अलग पाता है।

कभी वह जीवन में जिस प्रेम को सबसे महत्वपूर्ण समझता है ,वही प्रेम अब उसे प्रेम नहीं दिखता।

उसका प्रेम के नाम पर जीवन का तबाह हो जाना। कोई ऐसा भी है जिसनें प्रेम के नाम पर धोखा दिया।

जब एक बच्चा बड़ा होता है और दुनिया को अपनी नजरों से स्वतंत्र अनुभव करता है।

उस समय प्रेम उसे सबसे ऊपर नजर आता है। ऐसा लगता है मानो उसके लिए दुनिया में उस प्रेम के सिवा और कुछ भी नहीं है।

एक मशहूर मुहावरा है” प्रेम एक आग का दरिया है और डूब के जाना है।”


जब प्रेमी! प्रेम में होता है तो वह कहता है, प्रेम में मुझे आग के दरिया से गुजरना भी मंजूर है।

धीरे-धीरे समय बदलता है, इस मुहावरे का उसके लिए मानो अर्थ हीं बदल गया हो।

आगे वह समझता है, निश्चित तौर पर प्रेम एक आग का दरिया है। परंतु दुनिया में जीने के लिए प्यार के सिवा और भी कुछ महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं।

प्रेम में तो हम फंसे थे, प्रेमी ने हमें फंसा लिया था? मामला कुछ भी हो उसका खामियाजा स्वयं ही भुगतना पड़ता है।

प्रेम का नशा उतरने में ज्यादा समय नहीं लगता। एक ही कांच का बर्तन मानो बार-बार टूट कर बिखर रहा हो।

ऐसा लगता है जैसे हमारे प्रेमी ने प्रेम के नाम पर मुझे लूट लिया हो।

प्रेम के नाम पर धोखा देने वाले भी कम नहीं है। प्रेम के धोखे बाजो के लिए क्या कहा जाएगा। वास्तव में प्रेम का धोखेबाज प्रेम के साथ धोखा नहीं करता, वह तो अपने जीवन के साथ धोखा करता है।

वास्तव में प्रेम को छोटे शब्दों में कहें तो प्रेम वह है जो जींने में भी मजा देता है और मरने में भी।

प्रेम का लड्डू जीवन का तबाह। Pyar mein mein Dhokha. sanatansaty

तभी तो एक प्रेमी को हजार तकलीफ मिलता है, तो भी कहता है मुझे तो उसका साथ चाहिए। प्रेमी बार-बार कहता है चाहे तो पूरी दुनिया की खुशियां ले लो, परंतु प्रेम दे दो।

प्रेम रूपी आकर्षण का पट्टी जब बंधता है, तो दुनिया में उसे कुछ भी नजर नहीं आता ,शीवाय प्रेम के।

मानो उसे सब कुछ हरा हरा हीं दिख रहा हो।जब प्रेम का नशा उतरता है। प्रेम का बंधा हुआ पट्टी खुल जाता है ,तो उसे पता चलता है ,हमें तो प्रेम ने मारा।

प्रेम ने मेरा जीवन तबाह कर दिया। प्यार में मुझे धोखा मिला है।

मेरे प्रेमी ने मुस्कुराकर मुझे ठग लिया। प्रेमी ने मुस्कुराकर मुझे लूट लिया। प्रेम का दर्द! भावना के गहरे स्तर में स्थित हो जाता है। प्रेम का दर्द जीवन पर्यंत पीछा नहीं छोड़ता।

जबकि वास्तविक प्रेम पवित्र होता है। वास्तविक प्रेम में तो दूसरे की खुशियों का ख्याल रखा जाता है। वास्तविक प्रेम सामने वाले की खुशी पसंद करता है।

एक प्रेमी का जब दिल टूटता है तो वह बाद में विचार करता है। वह वास्तव में प्रेम नहीं था मेरे स्वयं का पागलपन था। परंतु जब तक वह प्रेम में धोखा खा चुका रहता है। अब उसे अपने जीवन को कोसने के सिवा और कोई उपाय नहीं है।

एक मशहूर कहावत है “हमें गैरों ने नहीं अपनों ने लूटा।”।

एक गैर लूट ले जाए तो वह तकलीफ नहीं देता , जितना कोई अपना लूटता है तो तकलीफ होता है। यही प्रेम का पट्टी है, गैर दिल में नहीं होता इसलिए नजरअंदाज करते हैं, और अपना नजर अंदाज करने नहीं देता। यह तो दिल की बातें हैं और दिल ही समझता है।

“प्रेम के लड्डू जो खाए वह पछताए जो न खाए वह भी पछताए।”

यह प्रेम वाला लड्डू एक जादू भरा होता है। जिसने नहीं खाया हो वह समझता है, कि दुनिया में मुझे सब कुछ मिला ,वह नहीं मिला जो सबको मिला।

जिसने इस लड्डू को खा लिया, वह उस लड्डू को खाया तो सही परंतु बाद में वह नि:स्वाद हो जाता है।

क्योंकि प्रेम के लड्डू का फितरत हीं ऐसा है। जो खाए वह पछताए जो न खाए वह भी पछताए।

प्रेम में जींए तब तक तो यह दुनिया स्वर्ग है और यदि प्रेम ने ठग लिया तो यह दुनिया नर्क के समान है।

पहले प्रेमी जीवन को जीने के लिए समय खोजता है। नशा उतरने के बाद उसे अपने जीवन को जीना पड़ता है।

पहले प्रेमी की हर बुरी आदतें अच्छा लगता है। परंतु बाद में प्रेमि का हर एक बात मानो कांटा चुभा देता हो।

वास्तव में यही हमारे अपने द्वारा बुना हुआ भावनाओं का जाल है। जिन भावनाओं को तोड़ने के लिए हम स्वयं से स्वयं को सक्षम नहीं हैं। अपनी भावनाओं को हम तोड़ नहीं सकते और दूसरे हमारे भावनाओं में आ नहीं सकते।
टूटे हुए दिल को लेकर जीना ही पड़ेगा।

यह दिल है! यह बार-बार टूटेगा। अभी एक बार नहीं हजार बार टूटेगा।

व्यक्ति इस दिल को बहलाना सीख ले, तो वह आसानी से टूटे हुए दिल को लेकर भी आनंदित जीवन को जी सकता है। दिल की बातें दिल हीं समझता है।

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