दिल के दर्द का विषय बहुत ही बड़ा और गहरा होता है।

भावनाओं से उत्पन्न हुआ यह दिल का दर्द जीवन से संबंध रखता है। दिल के दर्द का क्या उपाय है। अपने दिल के दर्द के लिए क्या करें ।What is the remedy for heartache? the pain of your heart. क्या एक व्यक्ति अपने दिल का दर्द दूसरों को बता सकता है। क्या दूसरा व्यक्ति किसी के दिल का दर्द समझ सकता है। क्या जिसे हम अपना दर्द सुनाएंगे उसके अंदर दिल में दर्द नहीं है।

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दर्दे दिल की जुबानं।

अपनों ने मारा क्या करें दिल बेचारा। दर्दे दिल की जुबानं।Dil ka dard.Someone broke heart what to do

दिल का विषय जिसे समाज में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। एक दिल है जो कहते हैं मानता नहीं।

दर्द में रोने वाला व्यक्ति कहता है इसमें दिल का क्या कसूर। दिल ही है जो संसार में अच्छा और बुरा कर्म करने पर मजबूर करता है। इस संसार में दिल है जो सुख और आनंद देता है। यह दिल ही है जो दुख और दिल में दर्द भी देता है।

सनातन साहित्य इस संसार को दुख वाला स्थान कहता है। अर्थात यहां पर दुख के सिवा और कुछ नहीं है। क्या यह संसार वाकई में दुख का जगह है?

इसे समझने के लिए दुख और सुख दोनों पर रोशनी डालना पड़ेगा। जिस प्रकार संसार में दिल के लिए सुख चाहिए उसी प्रकार दुख भी चाहिए। व्यक्ति को यदि सुख का आभास ना हो तो उसे किसी भी प्रकार दुख भी नहीं होगा। दिल ने यदि आनंद लिया है तो आगे चलकर दिल को दर्द भी होगा यह निश्चित है।

दिल अर्थात कहे तो भावना के ऊपर अपना कब्जा नहीं होता। अपने शरीर और इस प्रकृति का कब्जा होता है।

जन्म से दिल एक जैसा नहीं होता। दुनिया वस्तु बनकर दिल को लुभाता है। यह संसार कहीं सुंदरता बनकर दिल को लुभाता है। कहीं मधुर ध्वनि बनकर दिल को लुभाता है। शरीर के इंद्रियों का संसार के विषय से संयोग होता है। उस संयोग के बाद दिल के अंदर उस विषय वस्तु का इच्छा जागृत होता है।

जब इच्छा दृढ़ निश्चय के साथ चिंतन में आ जाता है तो व्यक्ति उसे पाने के लिए कोशिश करता है।

व्यक्ति को उस वस्तु के पीछे दूसरा भाग नजर नहीं आता। हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं। एक तो सामने वाला नजर आता है और दूसरा नजर नहीं आता।

व्यक्ति को चाहत में दूसरा पहलू यदि दिखता भी है तो उसे नजरअंदाज करता है।

जब सिक्के का एक पहलू प्राप्त हो जाता है तो दिल को चैन मिलता है। जब दिल को कोई विषय वस्तु प्राप्त होता है तो दिल आनंदित हो जाता है। क्योंकि दिल ने अनेक चिंतन के बाद उस विषय वस्तु को पाया है। उस दिल को यह पता नहीं है एक पहलू तो मैंने प्राप्त कर लिया ,अब बारी दूसरे पहलू की है।

सिक्के का दूसरा पहलू जिसका दिल ने कभी सोचा भी नहीं था।

परंतु सिक्का अकेला नहीं आता वह अपने साथ दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलता है।

सांसारिक किसी भी विषय का दो पहलू होता है। ठीक सिक्के के दो पहलू के बराबर।

दिल जब चिंतन करता है तो वह दूसरा पहलू को नजरअंदाज करता है। हम यह भी कह सकते हैं कि उस समय वह दूसरे पहलू को महत्व नहीं देता है।

उदाहरण के लिए जब किसी लड़की से मोहब्बत हो जाए अथवा लड़के से मोहब्बत हो जाए। उस समय प्रेमी को सिक्के का सिर्फ एक पहलू दिखता है।

उसे सिर्फ उस विषय का पहला पेज दिखता है। उस पेज के पीछे पेज में क्या है उसे नहीं पता। उस समय यदि पता भी चलता है तो दिल सोचता नहीं है और ना ही दिमाग को सोचने देता।

यह विशेषकर उसके साथ होता है जिसने किसी वस्तु को पाने की इच्छा की। वस्तु को पाने के लिए चिंतन किया।

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उस को पाने के लिए संघर्ष किया। यहां पर एक चिंतन करने योग्य विषय है। एक प्रेमी ने एक का प्रेम पाने के लिए यत्न किया।

उस प्रेम के पीछे एक दूसरा प्रेम भी आने वाला है। जिसके लिए उस प्रेमी ने कोई इच्छा नहीं की।

उस दूसरे पहलू के लिए किसी प्रकार का संघर्ष नहीं किया। परंतु प्रेमी के साथ प्रेम का दूसरा पहलू भी आता है।

सिक्के के दूसरे पहलू की तरह प्रेम का दूसरा पहलू ना चाहते हुए भी आएगा और आता भी है।

यह सत्य है हर व्यक्ति के अंदर कुछ अच्छा भी है और कुछ बुरा भी है। मैंने यह नहीं कहा की किसी का प्रेमी गलत है। वास्तव में तो सभीं प्रेमी है। कोई वस्तु हमारे पास आता है तो वह ऐसे नहीं आता है।

वस्तु को पाने के लिए सर्वप्रथम इच्छा अपना होता है। किसी वस्तु को पाने के लिए संघर्ष व्यक्ति स्वयं करता है।



जब कोई विषय वस्तु आएगा तो सिक्के के दो पहलू की तरह अपने दोनों पहलू को साथ लेकर आएगा। हम यह वस्तु को प्राप्त करने के बाद यह नहीं कह सकते वह वस्तु नहीं चाहिए। कोई वस्तु आएगा हमारी मर्जी से परंतु जाएगा अपनी मर्जी से।

यदि प्रेमी चाहिए तो उसके दूसरे रूप को भी स्वीकार करना पड़ेगा।


ऐसा नहीं है की सिर्फ आपके प्रेमी का रूप दूसरा है। दुनिया के हर प्रेमी में दूसरा रुप होता है। एक सिक्के के दो पहलू की तरह। यदि प्रेम में आनंद लिया है तो उस प्रेम के पीछे जो दर्द आएगा उसका भी आनंद लेना पड़ेगा।

उस समय यदि आप कहते हो कि नहीं हमको दर्द नहीं चाहिए तो ऐसा नहीं होगा।

आप दर्द नहीं लेना चाहोगे तो भी प्रेमी मजबूर होकर दर्द देगा। क्योंकि प्रेमी के अंदर नया दिखने वाला दूसरा पहलू अभी नहीं बना है। वह तो आपके प्रेम से पहले से मौजूद है।

दिल का दर्द दूसरे को बताया जा सकता है परंतु उसका दवा सिर्फ अपने हाथों में है।

कहते हैं दिल का दर्द कहने से दर्द हल्का होता है। अपना दर्द दूसरों को कहने से दिल को चैन मिलता है। ऐसा चैन तो आप अपने से कहोगे तो भी मिलेगा। दूसरे व्यक्ति आप के दर्द को समझ कर सांत्वना दे सकते हैं। परंतु आप के दर्द का इलाज नहीं कर सकते।

क्या ऐसा हो सकता है कि आप कोई सिक्का जेब में रखो और उसका एक हीं पहलू रखो।

क्या ऐसा हो सकता है कि सिक्के का एक तरफ का भाग हम अपने जेब में रखें। नहीं ऐसा नहीं होगा कोई सिक्का यदि जेब में होगा तो दोनों ने पहलू के साथ होगा।

प्रेमी जिस दिन सपने में आया उसी दिन से आनंद का भंडार लेकर आया। जब तक दूर था आनंद ही आनंद देता आया।

जब पास आया तो खुशियों का भंडार के साथ दुख का भंडार भी लेकर आया। क्योंकि यह वास्तविक सत्य है। संसार के हर विषय वस्तु का एक दूसरा रूप है जो अनेक बार बाद में पता चलता है।

जब दो प्रेमी दूर होते हैं तो उनके हाथ में यह अवसर होता है। वह उस प्रेमी को स्वीकार करें अथवा छोड़ दे।

परंतु जब दो प्रेमी सामाजिक बंधन में बंध जाते हैं उसके बाद दोनों को ही दूसरा रूप भी दिखने लगता है। यह दूसरा रूप किसी एक प्रेमी के अंदर नहीं होता। यह दूसरा रूप अपने अंदर भी हैं और सामने वाले के अंदर भी है। यह जीवन की वास्तविकता की कड़वी सच्चाई है। इसे जो व्यक्ति आपसी सामंजस्य के साथ स्वीकार कर लेता है तो दोनों प्रेमियों का जीवन सुख में व्यतीत होने लगता है।

ऐसा नहीं है एक प्रेमी को छोड़कर दूसरे प्रेमी के पास सिर्फ आनंद ही मिलेगा। ऐसा सोचना मूर्खता का कारण हो सकता है।

कहते हैं ऊपर से तो सभी हरा-भरा दिखते हैं। परंतु दुनिया में सब अपने दिल के अंदर दर्द छुपाए बैठे हैं।

यह दिल का दर्द है , जब तक डूबा रहता है तब तक कुछ सोचने भी नहीं देता।

और जब दिमाग सोचने लगता है तो पश्चाताप के सिवा और कुछ नहीं होता। दो प्रेमियों के आपस में साथ रहने का एक सरल उपाय हैं कि शेष जीवन के लिए समझौता कर लें।

जो प्रेमी समझौता नहीं करते उनके लिए यह संसार! दुख वाला संसार है। यह कड़वी सच्चाई उन्हें स्वीकार करना पड़ेगा।

वे जहां भी जाएंगे उन्हें एक दूसरा रूप निश्चित नजर आएगा। जब उन्होंने सिक्के के दो पहलू की तरह प्रेमी के दूसरे रूप को भी स्वीकार कर लिया वही शांति हो जाएगा।

यदि प्रेमी के अच्छे गुण को स्वीकार किया है तो उसके साथ रहने के लिए जीवन को जीने के लिए उसके कुछ बुराइयों को भी स्वीकार करना पड़ेगा।

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वास्तव में प्रेमी के अंदर बुराई ! बुराई नहीं है यह मानव जीवन का सच्चाई है।

अपने आनंद को अंदर अंदर ही आनंद लिया। और जब दुख आया तो दूसरे को सुनाने जाओगे ,वह दिलासा छोड़कर और क्या देगा।

दिल के दर्द का उपाय किसी के पास नहीं सिर्फ आपके पास है। अपने दिल को मनाना होगा दिल यदि मान गया तो जीवन में आनंद ही आनंद है।

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