स्वामी श्री विवेकानंद भारत के ऐसे महान संत रहे जिनकी ख्याति विश्व भर में मशहूर है।

पुस्तक समीक्षा स्वामी श्री विवेकानंद जी की राजयोग जो योग का एक सर्वोत्तम साधन है।स्वामी जी श्रीमद्भागवत गीता को विशेष प्राथमिकता देते रहें। स्वामी जी ने अपने संदेश में श्रीमद्भागवत गीता के चारों योग का विशेष प्रकार से वर्णन किया है। ज्ञान योग ,ध्यान योग कर्म योग ,एवं भक्ति योग।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js

ध्यान योग पर आधारित स्वामी जी की एक बहुत ही चर्चित पुस्तक है राजयोग।

आज जब एक पुस्तक पर समीक्षा लेख लिखने का विचार हुआ तो सर्वप्रथम स्वामी जी के राजयोग पर मेरा ध्यान केंद्र हुआ। परमात्मा की असीम कृपा रही कि मैंने आज से लगभग 5 साल पहले राजयोग पुस्तक मेरे हाथ आया।

मैं उन महान संत का भी आभार प्रकट करता हूं जिनके कृपा प्रसाद के रूप में मुझे राजयोग पुस्तक प्राप्त हुआ।

मैं अपने शिक्षण काल से ही स्वामी जी का विशेष समर्थक रहा हूं और हमारे जीवन पर स्वामी जी के शब्दों का अनेक प्रभाव है। चुकी यह लेख स्वामी जी के राजयोग के ऊपर आधारित है इसलिए मैं अभी स्वामी जी के ऊपर विशेष नहीं कहूंगा। स्वामी जी के जीवन के ऊपर जो हमने समाज से तथा उनके साहित्य से जो समझा है उसे संत विशेष में प्रकट करूंगा।

स्वामी जी द्वारा प्रस्तुत की गई पुस्तक राजयोग जो वर्ष १८९६ में प्रकाशित हुआ।

स्वामी श्री विवेकानंद को योग को सबसे पहले वैश्विक स्तर पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है। स्वामी जी ने इस राजयोग के माध्यम से इस पथ पर चलने के लिए आवश्यक साधन और उसके आधारित परिणामों का गंभीर रूप में चर्चा किया है।

यदि योग के विषय की बात करें तो भारत में योग की अपना एक प्राचीन ख्याति रहा है।


अपने आप में यह पुस्तक योग के लिए बहुत ही खास हैं ‌। स्वामी जी अपने इस पुस्तक के माध्यम से प्राण तथा प्राण के आध्यात्मिक रूप का वर्णन किया है। विशेषकर स्वामी जी ने इस पुस्तक के माध्यम से प्राण को संयमित करने के लिए विशेष विधि बताया है।

किसी व्यक्ति को योग के लिए किस प्रकार प्रत्याहार और धारणा करना चाहिए इसका उल्लेख भी स्वामी जी ने विशेषकर किया है।

स्वामी जी ने इस राजयोग के माध्यम से ध्यान और समाधि का विस्तार बताया है।

मेरे अनुभव के अनुसार स्वामी जी का यह पुस्तक महज राजयोग का पुस्तक नहीं है। यह स्वामी जी का संसार के लिए अपना अनुभव रूपी आशीर्वाद है। संसार में जो भी साधना और ध्यान का साधक हैं उनके लिए यह पुस्तक बहुत ही अहम तथा मुख्य साधन है।

मेरे अनुसार से सभीं ज्ञान योग एवं ध्यान योग वाले साधक को एक बार निश्चित तौर पर स्वामी जी का पुस्तक राजयोग का अध्ययन करना चाहिए।

स्वामी जी ध्यान को तो अहम मानते रहे साथ में वे ज्ञान योग को विशेष महत्व देते रहे। क्योंकि जितने भी योग बताए गए हैं सबका अंत परमेश्वर के ज्ञान से होता है। ध्यान भी उस ज्ञान तक पहुंचने का माध्यम है।

स्वामी विवेकानंद जी समाज में मौजूद भ्रांतियों से कोसों दूर रहें।

स्वामी जी ने हर समय वास्तविकता की बात करी। निश्चित तौर पर प्राचीन काल में अनेक महान वक्ता तथा महात्मा हुए ।

उसके बावजूद स्वामी जी की तुलना किसी से नहीं हो सकता।

जहां तक स्वामी जी के शब्दों को थोड़ा बहुत मैंने समझा है, उसके अनुसार से मैं कहता हूं कि स्वामी जी सिर्फ अध्यात्म के गुरु नहीं रहे। उन्हें भारत का भारत के नौजवानों के लिए ज्ञान गुरु कहां जाए तो भी कम होगा।

स्वामी जी के शब्दों का विचार कभी भी जाति धर्म पंत और समूह से ऊपर उठकर करना चाहिए।

स्वामी जी ने अपने शब्दों का प्रमाण एक जगह नहीं अनेकों जगह दिया है।

मैं अपने पाठक मित्रों से प्रार्थना करूंगा कि स्वामी जी के राजयोग को समझने के लिए सर्वप्रथम स्वामी जी को और करीब से समझना बहुत जरूरी है।

स्वामी जी भारत में खास क्यों कहे जाते हैं और स्वामी जी को भारत का हर समूह सम्मान देता है ।स्वामी जी को ज्ञान और ध्यान का गुरु कैसे कह सकते हैं यह स्वयं को जानना होगा।


मैं यहां स्वामी जी के शब्दों को अपने शब्दों में कहूंगा। दूसरे के समझ से कुछ नहीं होता स्वयं से समझना होगा कि वास्तविकता क्या है।

जब तक विचार के आखरी छोर तक न पहुंचे। तब तक उस विषय पर चिंतन करते रहें।

सुनकर किसी के पीछे जाने से वह फल नहीं प्राप्त होता जो होना चाहिए। यदि किसी के बारे में जानते हैं तो कितना जानते हैं। किसी के बारे में कितना जानना चाहिए यह भी जरूरी है।

आज स्वामी श्री विवेकानंद जी का भक्त दुनिया के कोने कोने में मौजूद है। और उनके भक्त सांसारिक रीति-रिवाजों और भ्रामक कुरीतियों से दूर है।

स्वामी जी के बारे में जितना हम जानेंगे स्वामी जी का शब्द हमें उतना ही आगे लेकर जाएगा।

स्वामी जी का पुस्तक राजयोग भारत के तथा विश्व के लगभग सभी पुस्तकालयों में तथा पुस्तक विक्रेता के पास उपलब्ध है।

इसके साथ ही आज नए जमाने के साथ राजयोग पुस्तक पीडीएफ के माध्यम से भी इंटरनेट से डाउनलोड किए जा सकते हैं।

विशेष स्वामी श्री विवेकानंद जी का विशेष मार्गदर्शन समाज को यूं ही प्राप्त होता रहे और स्वामी जी अपने शब्दों से साधकों का मनोबल बढ़ाते रहें और मार्ग देते रहे।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js

One thought on “पुस्तक समीक्षा स्वामी श्री विवेकानंद की राजयोग vivekanand rajyog book samiksha

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s