अतुल्य भारत अपने अंदर अनेक अतुल्य विरासत संजोए हुए हैं।

उन्हीं विरासत में विशेष  अतुल्य भारत के मशहूर व्यंजन जलेबी जिसे भारतवासी बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं। आज भारत में जलेबी अनेक प्रकार के बनते हैं परंतु जलेबी तो जलेबी हैं। भारत का बच्चा से लेकर वृद्ध तक जलेबी खाया करते हैं। भारत के हर जाति धर्म तथा सभी समूह के व्यक्ति जलेबी को आनंद पूर्वक खाते हैं।

भारतीय स्वादिष्ट व्यंजन जलेबी।



यह जलेबी कितना खास है कि व्यक्ति जलेबी का इस्तेमाल मुहावरा के रूप में भी कहा करते हैं।

जलेबी शब्द को हर भाषा और प्रांत के लोग अपने अपने तरीके से कहा करते हैं। बहुत ऐसे व्यंजन है जो भारत में पहले प्रचलन में नहीं था। परंतु जलेबी तो जलेबी है, प्राचीन काल में हमारे पूर्वज भी जलेबी खाया करते थे।


आज भारत के हर छोटे से छोटे बाजार में एक जलेबी का दुकान जरूर मिलेगा।

किसी को और कुछ समझ में आए अथवा ना आए जलेबी सबको समझ में आता है।

जिन्हें शुगर की बीमारी है उन्हें भी जलेबी पसंद है और उन्हें दो खाने के बाद भी ऐसा लगता है जैसा उन्होंने कुछ खाया ही नहीं है।



जैसे एक व्यक्ति जलेबी की तरह दूसरे को घुमाता है वैसा ही जलेबी भी अपने आगे पीछे पूरी दुनिया को घुमा रहा है। मानो जलेबी कहां शुरू होता है और कहां पर बनता खत्म होता है पता ही नहीं चलता।

गांव में जलेबी वाले को तो जलेबी भैया के नाम से पुकार लेते हैं। पर वो जलेबी भैया घुमाने वाले जलेबी भैया नहीं होते हैं वह तो बनाने वाले जलेबी भैया होते हैं।

जलेबी भारत का वह मशहूर स्वादिष्ट मिठाई है जो आज विश्व के हर कोने में मिल जाएगा। भारतवासी विश्व कहीं भी हों वे अपने भारतीय जलेबी को कभी भूल नहीं सकते। क्योंकि जलेबी तो जलेबी है।

जलेबी में एक और खास बात है और वह है इसे बनाना बहुत आसान है , परन्तु जलेबी वाला जो बनाता है वह जलेबी खास होता है।

जलेबी बनाने के लिए मुख्यतः तीन सामग्री लगती है। एक मैदा दूसरा खाने का तेल और तीसरा शुगर ! देसी भाषा में कहें तो चीनी। मैदा को जलेबी बनाकर तेल में तल देना और चीनी के चासनी में डुबो देना बस हो गया जलेबी।

इस जलेबी में खास बात है और वह खास क्या है।

भारत में बहुत प्रकार के व्यंजन होते हैं ।कुछ-कुछ व्यंजना ऐसे हैं कि विशेष वर्ग के लोग खाते हैं।

परंतु जलेबी के लिए किसी प्रकार का कोई विशेष वर्ग नहीं है। भैया जलेबी भी तो ऐसा है की इसे गरीब भी खाता है और अमीर से अमीर भी खाता है। शहर वाले खाते हैं और गांव वाले भी खाते हैं।

यह जलेबी ऐसा है ,उत्तर वाले भी खाते हैं और दक्षिण वाले भी खाते हैं ।पूरब वाले भी खाते हैं और पश्चिम वाले भी खाते हैं।

जलेबी लगभग भारत के हर प्रांत में बनते हैं और इसे हर भाषा के लोग खाते हैं। इसका मुख्य कारण है जलेबी तो जलेबी है। दुनिया रोज बदलता है और रोज बदलते जा रहा है , परन्तु जलेबी तो वही है। कुछ खट्टी जलेबी कुछ मीठी जलेबी, कुछ नरम जलेबी कुछ गरम जलेबी और कुछ कुरकुरे जलेबी।

जिसे भाता है वह खूब खाता है और जिसे नहीं भाता है वह भी खाता है।

जलेबी अतुल्य भारत का अतुल व्यंजन में मशहूर, पूरे जगत में उपस्थित एक ऐसा मिठा और स्वादिष्ट व्यंजन है।जिसको सब प्रेम से देखते हैं और प्रेम से खाते हैं।

जलेबी भी सबको प्यार करता है यकीन नहीं है! जो खाता है उसके मुंह में भी पानी आता है और जो नहीं खाता है उसके मुंह में भी पानी आता है।

कारण जलेबी को प्यार है बिना खाए भी मुंह में चला जाता है। यह जलेबी तो जलेबी है भारत का अपना प्राचीन जलेबी है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s