व्यंग आलोचना- ०१ गोलू गोली नोकझोंक भरा सामाजिक व्यंग। पति पत्नी की नोक झोंक।

पति-पत्नी का नोक-झोंक भरा व्यंगात्मक आलोचना।

”गोलू-गोली वार्ता”
गोलू गोली का आपसी नोकझोंक भरा व्यंग।

गोलू गांव का एक पढ़ा लिखा गवांर व्यक्ति है, और गोली शहर की महत्वकांक्षी महिला है।

कहते हैं जोड़ियां ऊपर वाला बनाता है या यूं कह सकते हैं कि जो जैसा है अपने अनुसार से खोज लेता है, नहीं तो साथ नहीं नीभता ।

गोलू और गोली के बारे में आगे हम और विस्तार से बताएंगे, यदि हम इनका व्याख्या करें तो शायद आप पढ़ नहीं पायेंगे। इसलिए इनकी नोकझोंक के साथ, बीच-बीच में व्याख्या भी चलेगा।

दोनों का आपस में मोहब्बत है, एक ने गांव छोड़ा और दूसरे ने शहर छोड़ा।

या यूं कह सकते हैं दोनों एक दूसरे के लिए, ना गांव में रहते हैं ना शहर में रहते हैं। इनकी आपस का बकबक कभी खत्म नहीं होता, लड़ते भी हैं , प्रेम भी करते भी हैं, दोनों एक दूसरे को गालियां भी देते हैं, और फिर आपस में सुलह भी कर लेते हैं।



एक दिन की बात है गोलू गोली से कहता है

”तूने तो मेरी जिंदगी झंड बना डाला, मैंने क्या-क्या नहीं सपने देखे थे।”
गोली पलट कर बोली ” बस कर…..! तूने सपने देखे थे कि सपने दिखाए थे। जरा याद कर क्या -क्या सपने दिखाए थे? मेरी जैसी जन्नत की हूर को तेरे जैसे लंगूर ही मिलना था, मेरी किस्मत फूटी थी कि मैंने फेसबुक पर अपना फोटो डाला। मैं तो विदेश जाने के सपने देखती थी, और तूने तो मेरा अपना शहर भी छुड़ा दिया। भगवान करे तेरी बुद्धि को आग लगे, मैंने अपने मां-बाप छोरे, अपनों को छोड़े अपने अपनों को छोड़ें अपने। और मिला तो तेरे जैसा निकम्मा। जो बातें तो लंबी लंबी करता है, पर काम की तो एक आने की भी नहीं।”

गोलूू तपाक से पलट कर बोलता है।


गोलू ”सिर्फ मेरी बातें तेरे को याद है अपनी बातें कुछ याद नहीं है, क्या बोली थी जरा याद कर, तू तो प्रधानमंत्री बनने के सपने देखती थी, क्या बोली थी तू ,मेरे गोलू राजा तुझे काम करने की क्या जरूरत है, तू तो मेरा बॉडीगार्ड बनकर रहेगा। तू तो प्रधानमंत्री बनी नहीं बनी, पर मैं तेरा जरूर बॉडीगार्ड बन कर रह गया। तेरी मोहब्बत में किस्मत का मारा, मेरे सीने में एक छोटा सा दिल बेचारा, क्या करें जब मेरी अपने दिलरुबा ने मोहब्बत में मारा। हे ऊपर वाले मेरे ऊपर रहम कर। इस गोली को मेरे दिल से निकाल दे।”

बोली तुरंत पलट कर बोलीं।

गोली”हां भगवान! कुछ तो रहम करो, इस गोलू ने मेरे को इतना गोल गोल गोल गोल घूम आया, कि मैं आज तक घूमती रही हूं, आज तो मेरी आंखों के सामने से इसको गोल कर दो, मैं समझ लूंगी कि मैंने कभी मोहब्बत ही नहीं किया।”
दोनों इस प्रकार लड़ते हैं, और खामोश होकर एक दूसरे से ऑपोजिट मुंह फेर लेते हैं। दोनों के जीवन में मानो सन्नाटा आ गया हो।  कुछ समय पश्चात दोनों एक दूसरे के सामने देखते हुए, गोलू कहता है ” कुछ भी हो पर मैं तो तेरे बिना जी नहीं सकता।”

दोनों की आंखें एक दूसरे में।

गोली हंस कर कहती है ”तू नहीं जी सकता तो मैं कैसे जी सकती हूं”
फिर दोनों हंसकर मिल जाते हैं। भला हो उस परमेश्वर का जिसने लड़ाई बनाई, शायद यह लड़ाई नहीं बनाई होती, तो मोहब्बत भी नहीं बना होता।


( अगले भाग २ गोलू गोली का रस भरा , गुदगुदाते हुए नोकझोंक…….)

आगे गोलू गोली वार्ता में सुनने को मिलेगा, दर्दे जुबान- प्रेमी प्रेमिका, जनता और नेता, पति पत्नी, बेरोजगार और नौकरी, जमीन और आसमान, भोगी और रोगी, दुख और आनंद, धर्म और अधर्म, सच और झूठ, स्त्री और पुरुष, खेत और किसान, मालिक और मजदूर, चाहत और नफरत, छात्र और शिक्षक तथा अनेक और भी बहुत सारे दिल की बातें, पर्दे के पीछे परदे के आगे, दिल बेचारा वास्तव में अपने आप का मारा।

व्यंग आलोचना- ०२गोलू गोली नोकझोंक भरा सामाजिक व्यंग। पति पत्नी की नोक झोंक।

भाग ०२
गोलू और गोली लिव इन रिलेशन में…..

गोलू बैठे एक गीत गुनगुनाते हुए ”हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने चाहे तू माने चाहे ना माने”

तभी गोली कपड़ों की गठरी गोली को मारते हुए ”हम तो तेरे दुश्मन हैं सदियों पुराने यह तू न जाने यह तू न जाने”

गोलू हक्का-बक्का रह जाता है वह भी समझ पाता तभी।

गोली कहती है”काम के ना काज के दुश्मन अनाज के, यह कपड़े कल धुले क्यों नहीं, 4 दिन से मैं तुम्हें बोल रही हूं पर तुम यह कपड़े धूल ते क्यों नहीं। आज तू मेरे पास कोई कपड़े भी नहीं है आज मैं क्या पहन कर जाऊंगी।”


गोलू अपने सर पर हाथ मार कर ” हाय रे मेरी किस्मत, फूटी रे मेरी किस्मत, हे भगवान आखिर यह कौन से पाप का बदला ले रहे हो। यह ना मेरी जान लेती है ना मुझे जीने देती है। गॉड तुसी ग्रेट नहीं हो, अब मेरे जीवन में कुछ बचा नहीं है। अब तो सिर्फ मेरे जीवन में एक सपना ही बचा है, साथ रहने से पहले इसने मेरे को लंबी-लंबी सपने दिखाए थे।मैं तो तुम्हारा ऐसी सेवा करूंगी मैं तुम्हारा ऐसे ख्याल रखूंगी मैं रोज चीज बना बनाकर खिलाऊंगी। आज तू मेरे सर पर आकर बैठ गई है, ना मुझे जीने देती है ना मरने देती है। सिर्फ तेरे पुराने सपने को लेकर जी रहा हूं।”

गोली गुस्से में बोली ” तुम मर क्यों नहीं जाता….. तेरे को कौन रोका है। वैसे भी तू यह जान ले, तुमने भी मेरे को बहुत सपने दिखाए हैं।

जानू….! मैं तो तुझे पलकों पर बिठा कर रखूंगा। तू जो कहेगी वह मानूंगा। आज मेरे सर पर आकर बैठ गया है, काम कुछ करता नहीं है, सिर्फ बातें तेरी लंबी लंबी है। तूने मेरा घर छुड़ा दिया, संसार छुड़ा दिया। मैं तेरे को बख्शने वाली नहीं हूं, आज यदि यह कपड़े नहीं धूले , तू देखना मैं तेरे साथ आज शाम को क्या करती हूं।”

गोलू रोते हुए ” डार्लिंग! दुनिया के सब सपने छोड़कर तेरी सेवा में लगा हूं।

मां छोड़ा बाप छोड़ा तेरी चक्कर में सारा संसार छोड़ा, और यदि यही हाल रहा तो एक दिन दुनिया छोड़ कर चला जाऊंगा, डार्लिंग! डार्लिंग मैं कर दूंगा मैं सब कर दूंगा” और इसके बाद गोलू अपने मन में कहता है ”लगता है भगवान ने इस राक्षसी को मेरे लिए ही बनाया है, जब मैं इसे छोड़ने की बात करता हूं, तू यह थाने जाने की बात करती है, हे भगवान मैं क्या करूं।

व्यंग आलोचना- ०३ गोलू गोली नोकझोंक भरा सामाजिक व्यंग। पति पत्नी की नोक झोंक।

गोली गोलू से ”गोलू! इन सभी नेताओं के बारे में क्या बोला जाए कुछ समझ में नहीं आता है, सामने सामने ही अपने बातों से पलटी मार जाते हैं। अब क्या कहीं गोलू! कोई बच्चे का कसम खाता है, कोई बाप का कसम खाता है, कोई भगवान का कसम खाता है, और खाते-खाते अपना शब्द ही खा जाता है।”  कहती है।

गोलू कहता है” अब तुम नेताओं पर जुलम कर रही हो। अरे तुम यह क्यों नहीं समझती, पलटी मारने पर तो उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।

अरे वे पलटी  नहीं मारेंगे तो कौन मारेगा, तुम उनके शब्द खाने की बात करती हो, वे तो रेत ,सीमेंट ,लोहा, भैंसों का चारा और ना जाने क्या-क्या खा जाते हैं, उनका बस चले तो पूरे संसार को खा जाएं और पता भी ना चले।

गोली प्यार से बोली ”हां गोलू……! मुझे तो लूंगी डांस वाला गाना याद आ रहा है, ससुरा इतना नाचा, इतना नाचा कि आज पूरा दुनिया को नचा रहा है, और सब के सब नाचे जा रहे हैं।

इसका भाग ०४;नीचे मिलेगा…..



भाग ०४
Coming soon….

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