रामचरित्र मानस मानव के लिए चरित्र का उत्तम मापदंड है। क्या राम चरित्र मानस सिर्फ राम कथा है। संसार में यदि चरित्र के मापदंड की बात करें तो श्री राम कथा से उत्तम कुछ नहीं होगा। राम कथा लोगों ने अनेक प्रकार से अनेक बार सुना होगा। प्रायः सभी को श्री राम कथा पता है। यहां तक की समाज में राम कथा के लगभग प्रत्येक किरदार सभीं व्यक्ति सब जानते हैं समझते हैं। चर्चा श्री राम कथा की।

गीता प्रेस गोरखपुर का आवरण पृष्ठ

रामचरितमानस में एक प्रचलित दोहा है।
मंगल भवन, अमंगल हारी,
द्रबहु सु दसरथ, अजिर बिहारी l
जो स्वयं ही मंगल के घर हैं, जिसके पास मंगल का भंडार है। जो सब प्रकार से अमंगल को दूर करने वाले हैं वे दशरथ नंदन श्री राम जो संसार में पुरुषोत्तम कहलाए वे हमारे ऊपर कृपा करें।

राम सिर्फ अपने शरीर से जन्मे हुए थे वास्तव में राम सदैव ही अजन्मा रहे। जो परमेश्वर नाम से ही पवित्र कहा गया है। जो सदैव हर प्रकार से निर्दोष है। जो हर प्रकार से मंगल करने का क्षमता रखता हो। जो हर प्रकार से अमंगल को दूर करने वाला हो वह तो परमेश्वर श्री राम ही हो सकता है। संसार में कुछ लोग राम को जन्मा हुआ मानते हैं। जबकि राम जन्म से पहले भी थे और जब संसार से चले गए उसके बाद भी हैं।

राम चरित्र मानस अतुलनीय है वैसे ही राम भी अतुलनीय है। वास्तव में जितने आश्चर्यजनक काम है जो एक सामान्य पुरुष के द्वारा ना हो उसे करिश्मा कहा जाता है। करिश्मा करने वाले को परमेश्वर के सदृश्य माना जाता है ।यह अब तक का सांसारिक मापदंड रहा है। यदि श्रीराम की बात करें तो राम का चरित्र, श्री राम का कर्म, श्रीराम का त्याग, श्री राम का प्रेम, श्रीराम का शासन। श्री राम चरित्र में यह सभी विशेषकर वर्णित है। और इस प्रकार से वर्णित है कि श्रीराम का तुलना किसी और से हो ही नहीं सकता।

गीता प्रेस गोरखपुर का आवरण पृष्ठ

श्री राम कथा-रामायण सिर्फ कथा मात्र नहीं हो सकता
एक राजा वृद्धावस्था में अनेक योग यज्ञ करने के पश्चात चार पुत्र को पाता है। राजा का पुत्र प्रेम ! अपने चरम पर था। चारों पुत्रों का श्री गुरु के द्वारा शिक्षा दीक्षा संपूर्ण हुआ । एक राजऋषि अपने यज्ञ की सुरक्षा के लिए श्री राम और लक्ष्मण को साथ लेकर जाते हैं। यज्ञ की सुरक्षा के बाद श्री राम के द्वारा धनुष भंग होता है। श्री सीता का श्री राम के साथ विवाह होता है और उनकी बहनों का श्री राम के भाइयों के साथ विवाह संपन्न होता है।

राजा बड़े पुत्र को राजगद्दी देने की घोषणा करते हैं। बात राजा की तीन रानियों में से एक रानी को पसंद नहीं आता और वह राजा से अपने लिए उपस्थित तीन वरदान का मांग करती है। राजा अपने दिए वरदान के आगे मजबूर थे। पिता के ना चाहते हुए भी माता कैकई का सम्मान करते हुए ,श्री राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन गमन करते हैं। छोटे भाई श्री भरत के लाख मना करने के बाद भी श्री राम वन से वापस नहीं होते और माता के अनुसार चौदह वर्ष वनवास में रहने का ही निश्चय रखे रहते हैं।

श्री राम वन गमन वन घूमने की इच्छा से नहीं गए थे

श्री भरत बड़े भाई की आज्ञा अनुसार राज्यभवन से दूर एक सन्यासी बनकर  राज्य का कार्यभार संभालते हैं। श्री राम अपनी पत्नी और भाई लक्ष्मण के साथ वन में भ्रमण करते हैं। अनेक ऋषियों और महर्षिओं से आनंद ग्रहण के पश्चात श्री राम पंचवटी वन में निवास करने लगते हैं।

रामचरितमानस कहता है कि व्यक्ति मायाजाल में सब कुछ खो देता है। एक राक्षस माया से सोने का हिरण बन कर आता है। श्री सीता उस हिरण पर मोहित होती हैं श्री राम उसके शिकार पर जाते हैं और श्री सीता जी के कहने के अनुसार छोटा भाई लक्ष्मण भी उनके पीछे जाता है। वह हिरन तो एक मायाजाल रहता है ।दोनों भाई हिरण के मायाजाल में पीछे थे। उसी समय संसार का सबसे बड़ा राक्षस रावण एक ऋषि का वेश‌ बनाकर श्री सीता जी के पास आता है।

रामचरितमानस यह शिक्षा देता है कि व्यक्ति को अपनी एक सीमा निश्चित करनी चाहिए। श्री सीता जी रावण रूपी ऋषि के बातों में आ जाती है और वह सामाजिक मर्यादा को लांघ कर ऋषि की सेवा में लग जाती है। रावण उसी समय श्री सीता जी का अपहरण करता है। इधर श्री राम और लक्ष्मण यह जानकर व्यथित होकर वन – वन श्री सीता जी का खोज करते हैं। श्री सीता जी की खोज में श्री राम और लक्ष्मण को एक बंदर के रूप में हनुमान मिलते हैं ।

रामायण में हनुमान जी अपने भक्ति द्वारा यह बताते हैं कि भगवान के सामने भक्तों को कैसा होना चाहिए। श्री हनुमान बहुत उत्तम सेवक रहे। श्री हनुमान जी के परामर्श से श्री राम का सुग्रीव से मित्रता होता है। श्री रामचंद्र सुग्रीव के लिए बाली का वध करते हैं। इसके पश्चात श्री हनुमान सुग्रीव के समस्त सेना को लेकर श्री सीता जी की खोज में निकलते हैं। श्री हनुमान समुंद्र को पार कर श्री सीता जी से मिलते हैं और रावण के लंका में आग लगाकर लौट आते हैं। श्री हनुमान जी के मंत्रना अनुसार समस्त वानर सेना को लेकर श्री रामचंद्र समुंद्र के ऊपर एक पुल का निर्माण करते हैं और लंका पर चढ़ाई करते हैं।

रावण अपने बल के अहंकार में अपने कुटुंब ओ सहित नाश को प्राप्त होता है। राम और रावण में भीषण संग्राम होता है उस संग्राम में रावण अपने समस्त कुटुंब के साथ मारा जाता है। रावण का एक छोटा भाई जो पहले ही श्रीराम के पास आ चुका रहता है। वह लंका का राजा बनता है। श्री राम लोक मर्यादा को देखते हुए श्री सीता जी का अग्नि परीक्षा लेते हैं। इसके पश्चात वे अपने भाई और पत्नी के साथ अपने राज्य अयोध्या लौट आते हैं। श्री राम का राज्याभिषेक होता है और इसके बाद रामराज्य शुरू होता है। श्री राम अनेक वर्षों तक राज्य का शासन करते हैं और समय अनुसार इस जगत को त्याग कर अपने लोक में प्रस्थान करते हैं। श्री राम कथा है।

क्या वास्तव में सिर्फ यह कथा ही राम कथा है।

रामचरित्र अतुलनीय है और राम अतुलनीय धाम है। यह समाज श्री राम को, रामचरित्र मानस को यूं ही सम्मान नहीं देता। जो श्री राम कथा पर उंगली उठाने वाले हैं उन्हें यह समझना चाहिए, श्री राम ने कहीं नहीं कहा कि तुम मेरी पूजा करो। श्री राम ने कहीं नहीं कहा कि तुम मुझे भगवान मानो। आज समाज राम को भगवान मानता है राम शब्द ही अनंत है। अनंत श्री राम को सिर्फ एक रामकथा में बांध देना राम को छोटा करने के बराबर है।

जो व्यक्ति श्री राम को जन्मा हुआ मानता है उनके लिए तो रामायण यही है। परंतु वास्तव में राम अपने जन्म से पहले भी थे और जन्म के बाद भी है। श्री राम अनंत है और उनका कथा भी अनंत है। कुतर्क करने वाले व्यक्ति अपने उम्र भर कुतर्क में ही अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं। उन्हें कुतर्क में कोई लाभ हासिल नहीं होता। जब परमेश्वर के भक्त अनंत हैं तो उनके द्वारा समझा गया कथा भी अनंत होगा। भक्तों के द्वारा कहा गया कथा भी अनंत होगा।

रामायण में श्रीराम ही खास नहीं है रामायण में सभी चरित्र खास है। रामायण के एक एक किरदार की तुलना और कहीं भी नहीं हो सकता। संसार में मानव के लिए जो सबसे उत्तम चरित्र हो सकता है वह श्रीराम का चरित्र है।
श्री राम चरित्र-
श्री राम ने सब के मान मर्यादा की लाज रखी। श्री राम अपने गुरु के परम प्रिय थे। अपने पिता के परम प्रिय बन कर रहे।

श्री राम एक पत्नी विचारधारा से थे। एक राजा के पुत्र रहते हुए, एक राज्य का उत्तराधिकारी रहते हुए माता पिता के इच्छा अनुसार वन में रहना पसंद करते हैं। एक सन्यासी का जीवन जीते हुए सनातन वैदिक कर्मों का अनुष्ठान करने वाले ऋषियों कल्याण करते हैं। श्री राम सुग्रीव को राज्य दिलाते हैं परंतु भोग नहीं करते। रावण को मारकर सोने की लंका विभीषण को देते हैं वे उस पर शासन नहीं करते।

जिस समाज में छुआछूत की प्रधानता रहा हो उस समय एक भीलनी का जूठा खाते हैं। जिस समाज में समाज के नीचे तबकों के साथ बैठने का रिवाज नहीं था उस समय श्री राम ने एक निषाद को अपना मित्र बनाया। अपने राज्य में सामाजिक व्यवस्था व्यवस्थित चले । इसके लिए महज एक व्यक्ति के कहने पर पत्नी का त्याग करते हैं। पत्नी का त्याग कर स्वयं पत्नी की भांति राजमहल में एक सन्यासी का जीवन बिताते हैं।

आज यदि एक राजा को ऐसा स्थिति आ जाए तो वह व्यक्ति घर अथवा पूरा गांव को ही खत्म कर देगा। राम एक राजा होते हुए भी वह कर्म योगी रहे। इसीलिए कहा जाता है कि परमेश्वर आए और नि:स्वार्थ भाव से कर्म किया और चले गए।

Ramayan – Ramcharitmanas (श्री रामचरित्र मानस)

राम चरित्र में चरित्र की प्रधानता है।

मनुष्य के द्वारा किया गया हर प्रकार का कर्म ही चरित्र है। यदि रामायण के समस्त किरदारों की बात करें तो सब अतुलनीय है। रावण से बड़ा किसी राक्षस का उल्लेख नहीं मिलता। भरत से उत्तम कोई प्रजा सेवक नहीं हो सकता। लक्ष्मण से उत्तम कोई बड़े भाई का सेवक नहीं हो सकता। श्री शत्रुघ्न से उत्तम कोई आज्ञाकारी नहीं हो सकता।

श्री रामायण के सभी चरित्र अपने आप में संसार को बहुत कुछ कहते हैं। आपसी प्रेम को बनाए रखने के लिए त्याग आवश्यक है। श्री रामचंद्र एक पूर्ण योगी रहे इसलिए उन्होंने हमेशा अपने आनंद का त्याग किया। संसार की आनंद को अपना आनंद समझा। इसीलिए कहा जाता है श्रीराम अतुलनीय है। रामायण एक अतुलनीय ग्रंथ है। सनातन मार्ग एक अतुलनीय मार्ग है।

2 thoughts on “श्री राम और रामायण। Charitra Puran Shri Ramcharitmanas.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s