भारत दर्शन ०२। अतुल्य भारत दर्शन। मानव संस्कृति का बेजोड़ संगम। हिंदू धर्म में भारत। सनातन धर्म।

मानव संस्कृति का बेजोड़ संगम अतुल्य भारत। अतुल्य भारत स्वयं से ही हमेशा अतुल्य रहा है। भारत को यदि भाषा की दृष्टि से कहा जाए तो आधिकारिक तौर पर 22 भाषाएं हैं। इन भाषाओं से अलग भी अनेक भाषाएं भारत में बोली और समझी जाती है।

भारत को विभिन्नताओं का देश कहा जाता है। आजादी के समय देश में लगभग 500 रियासतें अलग अलग था।

देश में जाति धर्म समूह विभिन्न प्रकार के हैं। परंतु इन सब के बावजूद भारत में यह थोड़ा भी पता नहीं चलता है कि एक जगह खड़ा हुआ दो व्यक्ति, दोनों ही अलग-अलग जाति धर्म अथवा भाषा रखते हैं। यह मानव संस्कृति का बेजोड़ संगम है।

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भारत के विभिन्नताओं की बात करें तो सभीं भिन्न-भिन्न रहते हुए भी सब एक हैं।

यहां का सबसे खास है धर्म समुदाय अलग होने के बावजूद भी यहां सभीं चैन की नींद सोते हैं। वैसे तो हर समाज में कुछ असामाजिक तत्व होते हैं जो अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए कुछ भी करने को तैयार होते हैं। उनकी संख्या गिनती में हो सकता है परंतु समाज उनसे नहीं चलता।

यहां का विशेष है दरवाजे पर आए हुए अतिथि को देव तुल्य मानना।

यहां की संस्कृति में यह सबसे विशेष है। भारत वह देश है जहां का वासी समस्त विश्व को अपना परिवार समझता है।

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यह इतिहास आज की नहीं है यह भारत की परंपरा रहा है।

निश्चित तौर पर इस परंपरा का अतीत में कुछ तत्वों ने इसका फायदा भी उठाया। इसके बावजूद भी भारत में यह परंपरा कायम है। अनेकों बार यहां की मूल संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश किया गया उसके बावजूद भी भारत की संस्कृति विश्व में अपना खास महत्व रखता है।

भारत में यदि खास की बात करें तो सब खास है। भारत का एक-एक राज्य अपना विशेष महत्व और गौरवशाली इतिहास रखता है।

भारत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर अरुणाचल तक सभी अपने आप में खास है। यहां का व्यवस्था भी वैसा ही है, भारत में सभी जाति धर्म समूह के व्यक्ति सरकार में अपना भागीदारी रखते हैं।

हर व्यक्ति को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी है।

हर व्यक्ति को अपना नेता चुनने की आजादी है। हर व्यक्ति अपने आप में स्वतंत्र है।

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भारत में भाषा की विभिनता के साथ यहां खानपान में भी बहुत विभिन्नता हैं।

खानपान की विभिनता होने के बावजूद हर संस्कृति  आपस में एक दूसरे का बहुत ही सम्मान करते हैं। अतीत में भारत ने अपने ऊपर बहुत ही दंश झेला।

भारत जो एक समय सोने की चिड़िया कहा जाता था ऐसे भारत को गरीबी का भी सामना करना पड़ा।

भारत में अध्यात्म का अपना परंपरा है जो हर जाति धर्म समूह में पाया जाता।

अध्यात्म जीवन को जीने के लिए महत्वपूर्ण बल अदा करता है। इस अध्यात्म का ही कारण है कि भारत एक बार फिर से खड़ा हुआ है। आज भारत आर्थिक दृष्टि से भी विश्व में अग्रसर की राह पर है।

भारत अपनी संस्कृति मैं आनंद पूर्वक है उसके बावजूद भारत का हर संस्कृति विश्व के सभी संस्कृतियों का आदर करता है सम्मान करता है।

यदि संक्षेप में कहें तो भारत की संस्कृति मानवता की बेजोड़ मिसाल है। इन सभी खासियत के साथ भारत सबसे अलग है, भारत की संस्कृति विशाल हृदय वाला है।

यह सिर्फ भारत नहीं अतुल्य भारत है।


भारत के बारे में और भी विस्तार से जानना है तो भारत सरकार का ही एक वेबसाइट है-
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