श्रीमद्भागवत गीता साधक संजीवनी।

श्रीमद्भागवत गीता के ऊपर प्राचीन काल से शोध होते रहा है। श्रीमद्भागवत गीता प्रेमी अपने – अपने अनुसार से गीता जी को समझते रहे और संसार को समझाते रहे। साधक संजीवनी साधक के लिए एक अमृत के समान

श्रीमद्भागवत गीता में हर प्रश्न का उत्तर मिलता है

साधक संजीवनी को समझने के लिए सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत गीता के बारे में समझना बहुत ही आवश्यक है। सनातन इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो श्रीमद्भागवत गीता से परिचित न हो। अध्यात्म से संबंधित श्रीमद्भागवत गीता में प्रश्न का उत्तर ना मिले शायद ऐसा हो नहीं सकता।

श्रीमद्भागवत गीता कथाओं के भेद को दूर करता है।
जितने भी धर्म शास्त्र हैं उनमें अधिकांश में कथाओं में मतभेद मिलेगा। वास्तव में कथा के ऊपर चर्चा हीं नहीं होना चाहिए। कथा किस उद्देश्य से आया है उस उद्देश्य पर चर्चा होना चाहिए। अफसोस की बात है कि आज भी समाज में लोग कथाओं में ही उलझे पड़े रह जाते हैं।

वक्ता के द्वारा कथाओं में मतभेद क्यों?

एक वक्ता अपने शब्दों को कहने के लिए अनेक उत्तम शब्द और वाक्य को लेने की कोशिश करता है। वाक्य में एक शब्द आगे पीछे होते हैं तो वाक्य का अर्थ बदल जाता है। कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि हंस पानी मिले दूध से दूध को पीकर उड़ जाता है उसके पश्चात लोगों को पता चलता है की पानी में दूध कभी था ही नहीं।


श्रीमद््भागवत गीता हर प्रकार केेेे सामाजिक मतभेद सेेे दूर हैैैै।
श्रीमद्भागवत गीता में किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं है। हां इसे कोई अपने अनुसार से श्री वेदव्यास जी की वाणी कहते हैं, कोई अपने अनुसार से श्री कृष्ण की वाणी कहते हैं, कोई अपने अनुसार से श्री विष्णु की बानी कहते है। अपने शब्दों में मैं इसे ब्रह्म की वाणी कहता हूं। यहां श्रीमद् भागवत गीता किसकी वाणी है इसके ऊपर कोई चर्चा नहीं है।

श्रीमद्भागवत गीता सभी वेद पुराण शास्त्रों का सार है। श्रीमद्भागवत गीता किसी की भी वाणी हो परंतु यह प्रमाणित है की श्रीमद्भागवत गीता समस्त वेद पुराण और सनातन साहित्य का सार है। श्रीमद्भागवत गीता संसार का सर्वोत्तम ग्रंथ है, प्रकृति का सर्वोत्तम सिद्धांत है। श्रीमद्भागवत गीता जाति ,धर्म ,समूह ,संप्रदाय इन सब से कहीं ऊपर है।

संसार के सभी महात्माओं ने श्रीमद्भागवत गीता को सम्मान दिया है । संसार के जिस कोने में भी जितने भी दार्शनिक महात्मा हुए वह किसी भी धर्म के हो, शायद ही कोई ऐसा मिलेगा जिन्होंने श्रीमद्भागवत गीता को अंगीकार ना किया हो। सब ने श्रीमद्भागवत गीता को सदैव ही मान सम्मान दिया है।



गीताप्रेस श्रीमद्भागवत गीता के ऊपर शोध करने वाला सबसे बड़ााा प्रेस है। प्रेस के द्वारा प्रकाशित साधक संजीवनी गीता जी के ऊपर हुए लगभग सभीं  के शोध का वर्णन करता है। गीता प्रेस वैसे तो हिंदू धर्म शास्त्र का संसार में सबसे बड़ा प्रचारक है। इसके बाद भी गीता प्रेस के लिए श्रीमद्भागवत गीता एक विशेष ग्रंथ है। सेठ जी स्वामी श्री जयदयाल जी गोयनका जिनके द्वारा भी श्रीमद्भागवत गीता तत्व विवेचनी के नाम से प्रकाशित है।

श्रीमद्भागवत गीता जी के विषय पर सबसे ज्यादा गीता प्रेस से पुस्तकें प्रकाशित होता है। सरल शब्दों में कहें तो श्रीमद्भागवत गीता का सबसे बड़ा प्रचारक गीताप्रेस है। अक्सर एक धर्म शास्त्र अथवा किसी किताब का विवेचन में व्यक्ति अपने भावनाओं के शब्द को जोड़ देता है। परंतु गीता प्रेस से निकले किताबों के ऊपर, धर्म ग्रंथों के लिए इस प्रकार नहीं होता।

गीता प्रेस विशेषकर प्राचीन ग्रंथों को सटीक तरीके से प्रकाशित करता है। गीता प्रेस के द्वारा प्रकाशित हुए किसी भी धर्म शास्त्र का अंक के ऊपर किसी विशेष व्यक्ति का मत नहीं चलता। यदि कहीं चलता है तो गीता प्रेस उसके नाम से प्रकाशित करता है।



साधक संजीवनी में ऐसे किसी प्रकार का दोष नहीं है। जो भी श्रीमद्भागवत गीता को मानते हो उनके लिए साधक संजीवनी सर्वोत्तम है।

श्रीमद्भगवद्गीता ईश्वर भक्ति वाले साधक के लिए संजीवन हैं। परमेश्वर के अनन्य भक्त हैं अथवा होना चाहते हैं ऐसे साधकों के लिए साधक संजीवनी वास्तव में जीवन का एक संजीवनी है। साधक संजीवनी आज के समय श्रीमद्भागवत गीता जी का सबसे बड़ा विवेचन संग्रह है। यह साधक संजीवनी साधकों के लिए मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध है। जिन्होंने भी गीता जी को थोड़ा भी समझा है उन्हें साधक संजीवनी को भली-भांति समझना चाहिए।

साधक संजीवनी श्री श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज का गीता जी के ऊपर विशेष शोध का फल है। गीता जी को कितना भी समझा जाए और गीता जी के ऊपर कितना भी बोला जाए कम होगा। गीता जी स्वयं ही अपने आप में बहुत बड़ी वक्ता हैं , गीता जी के शरण में जाने पर गीता जी स्वयं ही व्यक्ति को अपना शब्द देती हैं।

श्रीमद्भागवत गीता संसार का सर्वोत्तम ग्रंथ है। श्रीमद्भागवत जी का सभीं को अनुसरण करना चाहिए। श्रीमद्भागवत गीता जी का असीम कृपा रहा है जिसके ऊपर मैं आपके समक्ष कुछ शब्द अनुभव व्यक्त कर पाया हूं। आप समस्त गीता जी के चिंतकों का मैं आभार के साथ धन्यवाद करता हूं।

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