हर बार हर जगह सिर्फ औरत ही क्यों सुने? सनातन और हिंदू धर्म में प्रेम एक दर्शन।

औरत ही हर जगह हर बार अकेली क्यों सुनें?सामाजिक व्यवस्था में नारी का स्थान कहां है यह सभी को पता है। चर्चा तो बहुत होता है परंतु पुरुष प्रधानता की वजह से नारी के ऊपर जो ध्यान होना चाहिए वह नहीं होता है।

क्या ऐसा हो सकता है की महिला सिर्फ प्रेम देना ही जाने उसे प्रेम पाने का हक नहीं है।

ऐसा नहीं है कि नारी को प्रेम नहीं मिलता परंतु बहुत बार समाज में नजरअंदाज किया जाता है।



छोटी सी बच्ची जब से जन्म लेती है पहले वह मां के आश्रय में रहती हैं।

बड़ी होती है तो पिता के शासन में रहती है और जब विवाह हो जाता है तो वह पति के शासन में चली जाती है। ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि दोषी सिर्फ पति है। निश्चित तौर पर समाज बदल रहा है और बहुत कुछ बदल चुका है। परंतु और भी बदलने की आवश्यकता है।

पुरुष को महिला के प्रति अपनी सोच को बदलने की आवश्यकता है।

जब नारी के बराबर की बात आती है तो पुरुषों के अंदर रीति रिवाज का बात सामने आ जाता है। हर बार नारी ही कुर्बानी क्यों दें।



सिर्फ प्रश्न उठाने से काम नहीं चलता उसका निष्कर्ष भी निकलना चाहिए।

आज जो नारी और पुरुष में और असमानता है दिखता है उसका मूल कारण दोनों के सोच की सीमा है।

आज भी पुरुष की सोच असीमित है और परिवारिक जिम्मेवारी की वजह से स्त्री का सोच सीमित है। ज्यादातर मामले में देखा गया है नारी का सोच अपना बच्चा, अपना पति ,अपने सगे संबंधी और यदि नौकरी करने वाली नारी हो तो साथ में ऑफिस का सोच।

जितना भी बड़ा सपना होता है विस्तारवाद का सभी पुरुष ही देखा करते हैं। ऐसा नहीं है कि नारी नहीं देख सकती परंतु उसके साथ सामाजिक रीति रिवाज चले आ रहे हैं।

मैंने कहा समाज बदल रहा है बहुत कुछ बदल चुका है। समाज में अभी और भी बदलाव की आवश्यकता है। यदि पुराने इतिहास को देखें तो उस समय महिलाओं को सिर्फ भोग का हिस्सा समझा जाता था। पुराने समय और आज में काफी कुछ बदलाव हो चुका है।

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आज जो बदलाव की आवश्यकता है वह है ।घर के अंदर किसी भी रूप में रह रही नारी को प्रेम सम्मान कैसे मिले।

परिवार के अंदर लड़का और लड़की में असमानता न हो। स्त्री घर का मुख्य मालिक नहीं हो सकती ऐसा न हो। समाज में पुरुष के बराबर महिला को प्रेम मिले। महिला के हर बात को सुनी जाए, उसके जीवन के हर पहलू को परखा जाए।

जब व्यक्ति के अंदर क्रोध भरता है और वह उजागर ना हो तो वह बढ़ते जाता हैं।

किसी भी परिवार के अंदर जब इस प्रकार का वाक्या होगा तो आगे चलकर बहुत बड़ा विस्फोट होगा। किसी भी मसले को जबरदस्ती बहुत देर तक नहीं दबाया जा सकता। किसी भी परिवार के अंदर झगड़े का मुख्य कारण यही होता है। पारिवारिक हर मुद्दे का निष्कर्ष विचार विमर्श से निकालाल जाना चाहिए।

एक ही नारी कहीं बेटी होती है, किसी की पत्नी होती है और किसी की मां होती है।

इसके बाद भी नारी के पास अपना एक स्वतंत्र ज्ञान होता है। हर नारी के पास अपना एक स्वाभिमान होता है, हर नारी के पास अपना एक अहम होता है। जिसे जबरदस्ती दबाया तो जा सकता है परंतु सदा के लिए खत्म नहीं किया जा सकता।

एक नारी अपने लिए क्या खोजती है ? उसे अपनों से हौसला ,प्रेम  और सम्मान चाहिए।

इतिहास गवाह है नारी हर जगह प्रेम ही बांटती आई है‌। एक महिला को क्या चाहिए उसके अपने उससे पूछें आप बताओ आपको क्या चाहिए।

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