प्रकृति प्रेम यात्रा की-०८ स्वर्ग और नर्क क्या होता है? प्रेम और सम्मान स्वर्ग कैसे हो सकता है? हिंदू और सनातन धर्म में प्रेम एक दर्शन।

प्रेम और सम्मान का तुलना स्वर्ग से कैसे हो सकता है?सम्मान प्रेम का ही दूसरा रूप है। जब व्यक्ति के लिए किसी दूसरे के अंदर प्रेम जागृत होता है तो वह उसके लिए सम्मान पेश करता है। सभी प्रकार के साहित्य दर्शन अपने शब्दों में यही कहते हैं कि यातना नर्क है और आनंद  स्वर्ग है।

यातना अनेकों प्रकार के होते हैं उनमें मुख्य है शारीरिक और मानसिक। यातना तो यातना ही होता है।

शास्त्रों में इस लोक से लेकर परलोक तक में भी यात्रा का जिक्र किया गया है। इसी प्रकार आनंद का भी इस लोक से लेकर परलोक तक का जिक्र किया गया।



इस लोक में जो जीवित हैं उसे तो सब पता है कि इस लोक में स्वर्ग क्या है और नर्क क्या है।

परलोक की बातें तो चर्चा का विषय होता है। आज तुम अपना कर्म सुधार लो तुम्हारा परलोक सुधर जाएगा। परलोक में कर्म के अनुसार जिसके साथ जो होना है वह तो होगा। यदि चिंतन करें तो इस लोक में भी स्वर्ग और नर्क है।

अब बात आता है स्वर्ग कहां है और नर्स कहां है।

वास्तव में दोनों ही आपको अपने आंखों से दिख जाएगा, दोनों आपके घर में आपके अगल-बगल और आपके आसपास में मिल जाएगा। स्वर्ग और नर्क एक व्यक्ति के अंदर भी मिल सकता है। यदि कोई व्यक्ति प्रेम और सम्मान से लबालब जीवन को जी रहा हो तो यहीं जीवन उसके लिए स्वर्ग है।

इसी संसार में कोई ऐसा व्यक्ति हो जो अनेक तकलीफ और कठिनाइयों में जी रहा हो तो उसके लिए यहीं नर्क हो सकता है।

संसार में ऐसे व्यक्ति भी मिल जाएंगे जो परमेश्वर से अपने लिए रोज मौत मांगते हैं परंतु उन्हें जल्दी मौत भी नहीं आता। ऐसी तकलीफ में जीवन को जीने वाले के लिए यही संसार नर्क है।

सम्मान के बाद ही प्रेम शुरू होता है। इस दृष्टि से प्रेम सर्वोपरि है।

इसी जीवन में जिसे भरपूर प्रेम मिल रहा हो उसके लिए यह दुनिया ही स्वर्ग है। यहां पर एक विशेष बात है प्रेम सिर्फ लेने की सोचने से नहीं होगा। प्रेम का शुरुआत तो स्वयं करना होगा।

अपने अंदर प्रेम का शुरुआत करो, अपने प्रेम का दायरा बढ़ाओ। जब प्रेम का दायरा बढ़ेगा तो उसी समय प्रेम में तुम स्वयं भी डूब जाओगे। निकल पड़ो अपने प्रेम यात्रा पर?

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