संसार में मानव धर्म क्यों? हिंदू धर्म की आवश्यकता क्यों। सनातन धर्म दर्शन।

क्या मानव धर्म हीं हिंदू धर्म है? मानव धर्म यह किसके लिए है? मानव धर्म वह धर्म नहीं जो हमें अपने धर्म समूह से मिला है। अपना धर्म समूह हमें अपने लिए धर्म सिखाता है परंतु मानव धर्म संपूर्ण समाज के लिए धर्म सिखाता है। वास्तव में कोई धर्म छोड़ना नहीं है।

संसार में यदि धर्म की चर्चा की जाए तो सबसे बड़ा धर्म मानव धर्म होगा।

क्योंकि हमारे घर का रीति रिवाज पूरे समाज के रीति-रिवाज से बड़ा नहीं हो सकता। हमारे अपने घर का धर्म पूरे संसार का धर्म नहीं हो सकता।

मानव धर्म एक सामाजिक धर्म है जिसका निर्माण किसी धर्म समूह ने नहीं किया।

मानव धर्म तो हम मानवों से भी कहीं ऊपर है। समाज से यदि कोई बच्चा बिछड़ कर जंगल में रहने लगे और वह मानवता को छोड़ दें। वैसा बच्चा किसी भी प्रकार मानव नहीं कहलाएगा।

मानव के अंदर हमदर्दी करुणा और विशेष भावना मौजूद है।

मानव ही है जो अपनों के लिए सोचता है, अपने अपनों के लिए सोचता है, अपने समस्त संसार के लिए सोचता है।

देश के कानून भी मानव और मानव का व्याख्या करके हीं सजा देता है।

मानव का ही धर्म है कि वह समस्त संसार की रक्षा करें, मानव का ही धर्म है कि वह संसार के सभी मानवों को मानव जाति का समझे और सब से प्रेम करें।

किसी व्यक्ति के ऊपर संसार निर्भर नहीं रहता संसार के ऊपर व्यक्ति निर्भर रहता है।

सभी धर्मों में मानवता एक मुख्य धर्म है जिस धर्म के बाद हीं सभीं धर्म आते हैं। इसलिए मानव धर्म एक ऐसा धर्म है जो सभीं मानव के लिए आवश्यक है।

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