क्या भगवान भक्तों को तकलीफ देते हैं? हिंदू धर्म। सनातन धर्म दर्शन।

क्या भगवान कभी भक्तों को तकलीफ देते हैं? परमेश्वर एक मां की तरह है। जिस प्रकार मां को बच्चे से अपने प्रेम के बदले कुछ नहीं चाहिए परमेश्वर भी वैसा ही है। वैसे तो परमेश्वर सबके लिए समान व्यवहार करता है, परंतु जो भक्त परमेश्वर का अनन्य भक्त है परमेश्वर सदैव उसके साथ मां के जैसा व्यवहार करते हैं।

जिस प्रकार मां बच्चे के अच्छे के लिए हर वह काम करती हैं जो उसे करना चाहिए।

उसके लिए बच्चे को यदि रुलाना पड़े तो भी मां संकोच नहीं करती। मां सदैव हर प्रकार से अपने बच्चे का भला ही करती है। वैसे ही एक भक्त का भगवान सदैव भला ही करते हैं। संक्षेप में कहें तो भगवान के अंदर भक्तों के लिए वात्सल्य का भंडार है जो कभी खत्म नहीं होने वाला।



बच्चे को क्या चाहिए यह माता से बेहतर कोई नहीं जानता। ठीक उसी प्रकार भक्तों को क्या चाहिए भगवान को पता है। एक सेवक को क्या चाहिए वह स्वामी को पता होता है।

दुनिया में बेचैन कौन है यह उससे पूछो जिसे रात में नींद ना आता हो।

तकलीफ क्या होता है उससे पूछो जिसे मरने के समय कोई अपना पानी देने वाला ना हो। तकलीफ क्या होता है उससे पूछो जो परमेश्वर से बार-बार अपने मौत की भीख मांग रहा हो। इसलिए परमेश्वर के विधान में परमेश्वर का क्रोध मत देखो।

परमेश्वर अपने पास बुलाने से पहले वह अपने जैसा बना देना चाहता है।

संसार में कहां गया है जो योग्य ना हो उसे कोई बड़ी वस्तु दे दो वह उसे संभाल नहीं पाएगा। इसलिए परमेश्वर कुछ देने से पहले उसके योग्य बनाता है।

परमेश्वर की भक्ति में अपना तकलीफ मत देखो। अपने आप को डूबा दो उस परमेश्वर की याद में।

उस परमेश्वर से प्रार्थना करो। हे परमेश्वर! मेरे लिए कुछ भी शेष न रखना। हे परमेश्वर तू यदि मुझे नर्क में लेकर जाएगा तो भी मैं जाने के लिए तैयार हूं। हे परमेश्वर यह तन छूट जाए छूट जाए परंतु तेरे से मिलने की आस कभी न छूटे। मेरा जीवन तेरा है और इस पर तेरा संपूर्ण अधिकार है। हे परमेश्वर मेरे समस्त इच्छाओं पर तू कब्जा कर ले। मुझे बेवजह संसारिक भावनाओं में भटकने न दे ।

हे स्वामी! मैं तेरे इस संसार में सिर्फ और सिर्फ तेरा नौकर बन कर रहा करूं। हे स्वामी मुझे शक्ति दे कि मैं अपने इस जीवन के युद्ध को पूरे धर्म के साथ लड़ कर विजय पाऊं। हे परमेश्वर मेरा यह तन छूट जाए परंतु तेरा विश्वास न टूटे।

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