कौन है जिसे प्रेम नहीं चाहिए? हिंदू और सनातन धर्म में प्रेम एक दर्शन।

संसार में कौन है जिसको प्रेम नहीं चाहिए?कहते हैं धरती पर यदि सबसे कोई खतरनाक जीव है तो वह है मानव! एक शेर हिरण का शिकार करता है क्यों? क्योंकि वह घास नहीं खा सकता। मानव अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए, धन का संचय करने के लिए बेवजह प्रकृति में अनेकों गुनाह करता है।



इन सबके बावजूद प्रेम सबको चाहिए।

व्यक्ति किसी भी उम्र का हो या किसी भी धर्म जाति – समूह का हो। सब चाहते हैं हमारे अपने हम से प्रेम करें।

सभीं चाहते हमारे अपने तो सम्मान करें साथ-साथ संसार हमें अधिक से अधिक सम्मान करें। इस प्रेम को समझने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है।

घर के अंदर एक पाला हुआ जीव भी हमेशा चाहता है हम उसके साथ प्रेम करे।

एक छोटा बच्चा समझता है कि माता-पिता में हमसे ज्यादा प्रेम करने वाला कौन है। हर मां-बाप समझता है कि हमारे बच्चे किस से प्रेम ज्यादा करते हैं। प्रेम का आधार यहां कुछ भी हो सकता है।

प्रेम एक बगल में चिड़ियों को देखकर समझ में आ सकता है। चिड़िया अपने बच्चे के लिए कितना यत्न करती है।

एक चिड़िया दिन भर अपने बच्चे के लिए दाना चुगती रहती है। वहीं चिड़िया के बच्चे जब बड़े होकर उड़ जाते हैं, आगे चलकर बिछड़ जाते हैं तो वहां भी चिड़िया को तकलीफ होता है। क्योंकि चिड़िया को भी संसार में प्रेम चाहिए।



संसार से यदि प्रेम चाहिए तो व्यक्ति को भी संसार से प्रेम करना पड़ेगा।

संसार के हर व्यक्ति से प्रेम करना पड़ेगा। संसार में अधिक क्रोध का वितरण करेंगे तो पलट कर हमें क्रोध ही मिलेगा। संसार में यदि हम लालच का वितरण करेंगे तो पलट कर हमें लालच मिलेगा।

मानव को यदि प्रेम का जरूरत नहीं होता तो शायद आज इतना बड़ा समाज का निर्माण नहीं होता।

संसार में सभी प्रेम के भूखे हैं। प्रेम तो सभी एक ही है परंतु प्रेम का आधार अलग-अलग है।

One thought on “दुनिया में सबको प्रेम चाहिए। Sansar mein sab Prem ke bhukhe Hain.

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