धर्म का आधार क्या? हिंदू धर्म का आधार क्या है। सनातन धर्म धर्म के लिए क्या कहता है।

धर्म क्यों?हिंदू धर्म में धर्म का आधार क्या है।
धर्म शब्द से प्राय: समाज में एक ही अर्थ निकलता है, जाति धर्म। जबकि धर्म के लिए इस प्रकार नहीं कहा जा सकता, सामाजिक रीतियों द्वारा बनाए गए, अथवा बने हुए, जाति वर्णाश्रम, तथा परमेश्वर को मानने के तरीके से, धर्म की व्याख्या किया जाता है, जोकि धर्म शब्द को बहुत ही छोटे स्वरूप में बांधना होता है।

विशेष समूह के लोगों को, विशेष विशेष धर्म की उपमा दी जाती है, जिसे वास्तव में धर्म नहीं कहा जा सकता। मानवता की दृष्टि से अनैतिक कर्म को छोड़कर, नैतिकता से किया गया हर कार्य धर्म है।

मानवता की दृष्टि से किया गया सभी प्रकार का अच्छा कर्म धर्म कहा गया है।

यह काम दुनिया में सभी समूह के लोगों द्वारा किया जाता है। हिंदू शब्द कभी उपनाम था, जो कि आज मुख्य नाम से जाना जाता है। जो कि हिंदुओं का मुख्य आधार रहा है, वह सनातन धर्म पद्धति रहा है।



सनातन दिव्य शास्त्रों में कथन है
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ⁠।तस्माद् धर्मं न त्यजामि मा नो धर्मो हतोऽवधीत् ⁠।⁠।
अर्थात-जो पुरूष धर्म का नाश करता है, उसी का नाश धर्म कर देता है, और जो धर्म की रक्षा करता है, उसकी धर्म भी रक्षा करता है । इसलिए मारा हुआ धर्म कभी हमको न मार डाले, इस भय से धर्म का हनन अर्थात् त्याग कभी न करना चाहिए ।

One thought on “हिंदू धर्म का आधार क्या है। Hindu dharm ka Aadhar.

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