श्रीमद् भागवत क्या कहता है। भागवत कथा। सनातन धर्म में भागवत पुराण एक दर्शन। हिंदू धर्म।

प्रेम रस से भरा हुआ ग्रंथ श्री भागवत पुराण।सनातन साहित्य में विशेषकर परमेश्वर की भक्ति के लिए मुख्य चार मार्ग बताए गए हैं। एक तो ज्ञान योग-जिसमें ज्ञान के जरिए भक्त परमेश्वर को देखता है।

दूसरा है कर्म योग-इसके जरिए भक्त अपने कर्मों के जरिए परमेश्वर का भजन करता है।

तीसरा है ध्यान योग-इसमें भक्त ध्यान के जरिए परमेश्वर को अपने अंदर और समस्त ब्रह्मांड को परमेश्वर के अंदर देखने की कोशिश करता है। चौथा है भक्ति योग-जिसमें भक्त परमेश्वर के स्वरूप का भक्ति करता है, भक्त परमेश्वर के एक आनंददायक स्वरूप का पूजन भक्ति के द्वारा करता है।



पुराण एक ऐसा पुराण है, जिसमें सभी शास्त्रों का अंश विराजमान है।

यूं कह सकते हैं, सभी शास्त्र मिलकर एक भागवत बना हुआ है। भागवत अर्थात परमेश्वर के रहने का स्थान। भागवत सनातन हिंदू धर्म में 18 मुख्य पुराणों में एक है।

यह संपूर्ण पुराण भक्ति रस से सराबोर है।

शब्दों के जरिए परमेश्वर के स्वरूप का चित्रण किया गया है, भागवत का महत्व पूरी तरह से समझना तो शायद किसी के लिए संभव न हो।

जितने भी पुराण है, यदि पुराणों का अवलोकन करें तो पता चलता है।

सभी परमेश्वर के लिए तो एक ही प्रकार के शब्द कहते हैं, परंतु परमेश्वर के स्वरूपों का व्याख्यान अलग-अलग प्रकार से किया गया है। कोई इसे अनेक परमेश्वर मान लेते हैं। सनातन में चरित्र की महानता है, महान चरित्र को लेकर लोगों का अपना अपना विचार होता है, और सभी के अपने अपने विचार के अनुसार से देवता हैं, और देवता का स्वरूप है।

सनातन साहित्य में श्री राम के साथ रावण का भी सम्मान है।

श्री दुर्गा के साथ महिषासुर का भी सम्मान है। यदि ध्यान से सभी शास्त्रों का मूल देखा जाए, तो परमेश्वर एक है, वही सूर्य को शक्ति देता है, वह स्वयं हीं विशाल ब्रह्मांड का अधिष्ठाता है।



भागवत पुराण भक्ति पर आधारित है, भक्ति प्रेम रस पर आधारित होता है।

इसलिए भागवत भक्ति प्रेम से भरा हुआ है। भारत में सनातन पद्धति को मानने वाले शायद ही कोई एक होंगे ,जो भागवत में श्रद्धा न रखते हो। प्राचीन इतिहास में, सुनने को मिलता है कि एक समय, श्री भागवत कथा को सुनने के लिए, कभी परमेश्वर भक्त महीनों और सालों इंतजार करते थे।आज भी भारत के कोने कोने में भागवत का कथा हुआ करता है।

इस पुराण की रचनाकार महर्षि श्री वेदव्यास जी के द्वारा हुआ है ।

ऐसा माना जाता है। इस पुराण को विशेषकर श्री सुखदेव जी द्वारा श्री महाराज परीक्षित को सुनाया जाता है। इसमें परमेश्वर के 10 अवतार का विशेष वर्णन है, एक मत्स्य अवतार, दूसरा कूर्म अवतार, तीसरा वाराह अवतार, चौथा श्री नरसिंह अवतार, पांचवा श्री वामन अवतार, छठम श्री परशुराम अवतार, सातवां श्री राम अवतार, आठवां श्री कृष्ण अवतार, नवम श्री बुद्ध अवतार, और दसवां एक अवतार जो आने वाले हैं, उनके लिए जिक्र किया गया है, उनका नाम है श्री कल्कि अवतार।



कथाओं के ऊपर सनातन साहित्य में भी अनेकों मतांतर है। कथाओं के ऊपर जो मत का अंतर है ,वह पूर्णता कभी दूर नहीं हो सकता। कहते हैं प्रेम अंधा होता है, परमेश्वर की भक्ति भी वैसा ही है, परमेश्वर के बारे में सुन लिया और मान लिया। कोई शंका नहीं और कोई सवाल नहीं। परमेश्वर ने संसार में आनेको आश्चर्यजनक रचनाएं किए हैं, ऐसे रहस्य हैं, जिन्हें विश्व के समस्त शोधकर्ता समझ नहीं पाते है, तो यह आम व्यक्ति क्या समझ पाएगा। भागवत के बारे में विशेष में कहें, तो इसमें भक्ति रस ऐसा है, कि जो डूब गया, वह पूरी तरह से परमेश्वर का हो गया। भक्तों को परमेश्वर के सामने यह समस्त संसार तुच्छ लगेगा। इसके देवता भगवान श्री कृष्ण हैं, जिन्हें सनातन में अनेकों नाम से पुकारा जाता है। सनातन श्रीकृष्ण को, श्री अनंत, विराट स्वरूप, श्री विष्णु, श्री राम तथा श्रीमद्भागवत गीता में यह स्पष्ट कहा गया है, कि संसार में जितने हो चुके हैं, जितने हैं, और भविष्य में जितने होने वाले हैं, सभी महान विभूति, सभी श्रेष्ठ, सभी तत्व , यह सभी भगवान श्री कृष्ण के ही अंश है।

https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s