मानव क्या खोज रहा है। हिंदू धर्म में शांति कैसे मिले। शांति के लिए सनातन धर्म क्या कहता है।

क्या एक मानव समाज के अंदर अपने लिए शांति खोज सकता है।कहते हैं जरूरतें कभी पूरा नहीं होता। जरूरत ! आखिर क्यों पूरा हो? जरूरत यदि रोटी कपड़ा और मकान का होता तो निश्चित तौर पर पूरा हो जाता। परंतु मानव की इच्छाएं कभी पूर्ण नहीं होता।

जब मानव आदिमानव युग में जी रहे थे, तब मानव को सिर्फ और सिर्फ रोटी कपड़ा और मकान चाहिए था। पहले लड़ाई भी होती थी, परंतु वह लड़ाई अलग था।



आजकल लड़ाई अलग है, आज भी कुछ ऐसे हैं, जिन्हें मजबूरी में भूख को लेकर लड़ना पड़ता है, परंतु इसमें संख्या कम है।

अभी अधिकांश लड़ने वालों में, वे लोग हैं, जो रोटी कपड़ा और मकान से सक्षम है।



अब व्यक्ति को इनके अलावा, नाम, यश, प्रभुत्व, शासन, व्यसन, तथा इनके साथ अनेकों प्रकार की इच्छाएं लड़ने को मजबूर करता है। सभी को पता है यह किसी के साथ नहीं जाने वाला है। यदि कोई व्यक्ति अपना कुछ लेकर जाएगा, वह उसका सिर्फ अपना नियत होगा। क्योंकि नियत ही है, जो जीवन को जीने में आनंद देगा ,और जो मरते वक्त भी आनंद देगा। यह सभी इच्छाएं कितने काम की है, जिसके ऊपर व्यक्ति अपना पूरा जीवन लगा देता है। यह यदि हम एक वृद्ध से पूछें, तो वह बताएगा, कि उसने अपने समस्त जीवन को कहां लगाया, और अपने बहुमूल्य जीवन को क्यों लगा दिया। यदि वह ऐसा नहीं कहता,तो वह अपने कर्म का धनी है, और उसके ऊपर परमेश्वर का विशेष कृपा है।

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One thought on “रोटी कपड़ा और मकान। Manav ashanti mein Shanti khojta hai.

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