क्या आपने आपको भगवान से तुलना करना अच्छा है? हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

क्या व्यक्ति भगवान बन सकता है।सभी मानव परमेश्वर को अपने सदृश्य मानते हैं, हम सभी मानव का सोच हो सकता है। एक तर्क से यह कहा जा सकता है की धरती पर जितने भी जीव हैं, उतने ही स्वरूपों में उनके भगवान हो सकते हैं। धरती पर सभी जीवो को करीब से देखे तो यह निश्चित पता चलता है, सभी का आपस में संपर्क का एक भाषा है।

क्या आपने आपको भगवान से तुलना करना अच्छा है? हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

भावनाओं के आधार पर हम इस बात को स्वीकार करेंगे कि वे सभी सत्य हैं। अपने आपको परमेश्वर के सदृश मानना अथवा तुलना करना, यह मूर्खता के बराबर हो सकता है।

परमेश्वर का अंश मानना अलग बात होता है, और परमेश्वर के बराबर मानना अलग बात है। परमेश्वर वह है जिसके अंदर कुछ निर्माण करने की, कुछ पैदा करने की क्षमता है। मानव एक तरीके से रिपेयर करने की, तथा एक बने हुए को दोबारा दूसरा बनाने की कोशिश करता है। परमेश्वर कितना महान है इसका ठीक तरह से कल्पना भी नहीं हो सकता ।

मानव एक शक्ति को लेकर, दूसरे जगह स्थित कर कहता है ,कि उसनें शक्ति का निर्माण किया है।

परंतु परमेश्वर का शक्ति अपना शक्ति है। वह परमेश्वर तो अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता है। सनातन साहित्य, अथवा धरती के सभी महामानव यह अनेक बार निर्देशित करते रहे हैं, कि वह परमेश्वर अनंत है, अतुलनीय है, आज तक कोई उसे देख नहीं पाया इसलिए वह निराकार है। वह जगत के हर कण-कण में विराजमान है।

इस धरती से बाहर भी दुनिया है, इसे ना चाह कर भी स्वीकार करना पड़ेगा। वह परमेश्वर अनेकों दुनिया का मालिक है।

उसका सत्ता मानव स्वीकार करें अथवा न करें, परंतु दुनिया पर तो हुकुमत उसी का चलता है। वह परमेश्वर हीं एक सत्य है, यही सनातन सत्य है।

One thought on “क्या भगवान बना जा सकता है। Bhagwan se tulna.

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