सत्य क्या है और हम सत्य किसे कह सकते हैं? हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

सत्य क्या है और सत्य को कैसे पहचाने।सत्य को समझने के लिए, यह समझना किस सदा बना रहने वाला तत्व क्या है। विज्ञान शब्द हम इंसानों का बनाया हुआ है, जो इंसान के साथ खत्म हो जाएगा।

जो नहीं रहने वाला है वह सत्य नहीं हो सकता।

सबको पता है सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है,फिर भी वास्तव में दृश्य रूप से समाज का ईश्वर पैसा है। सबको पता है सत्य से हीं दुनिया चल रही है। जो बना है वह  टूटेगा।

कहते हैं परमेश्वर अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेता।

यह सत्य है, परमेश्वर अपने से न तो किसी को कुछ देता है और न ही किसी का कुछ लेता है, यह संसार अपने प्रकृति का गुलाम है। अपने कर्म का गुलाम है, कर्म फल का गुलाम  है।

कोई कहता है ”परमेश्वर के सामने जाओ हाथ जोड़ लो, उसकी बंदगी कर लो, वो ईश्वर बहुत ही रहम दिल वाला है सब माफ कर  देगा।”  वास्तव में परमेश्वर के पास कोई दिल नहीं है, उसके प्रकृति के पास दिल है, जो इस प्रकृति को जो भी देता है जैसे देता है, यह प्रकृति उसे वैसे हीं लौटा देता है।

इस प्रकृति में किए हुए सारे पापों का हिसाब यह प्रकृति करने वाला है।

प्रकृति सिर्फ वह नहीं है जो हमें अपनी आंखों से दिखता है, यह संपूर्ण ब्रह्मांड उसी प्रकृति का हिस्सा है ।

पापों का लेखा-जोखा लिखने वाला कोई परमेश्वर कोई बाहर का नहीं है। जीव के अंदर ही बैठा हुआ है , वास्तव में अच्छे बुरे कर्म हमारा मन बुद्धि स्वत: ही संज्ञान लेता है।

उस संज्ञान लेने वाले तत्व को कोई कुछ भी कहे, क्योंकि कोई उसे देखता नहीं है ,व्यक्ति अपने अंदर महसूस कर‌ सकता है।

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