बच्चे के पढ़ाई में सबसे बड़ा बाधा क्या है, बच्चे का मन केंद्रीत क्यों नहीं होता? हिंदू धर्म। स्नातन धर्म।

बच्चे का पढ़ने में मन नहीं लगता उसके लिए क्या करें।पढ़ाई करने में सबसे बड़ा जो बाधक है, वह है बच्चे के पढ़ाई के विपरीत, बच्चे का प्राकृतिक तत्वों का संयोग होना। जैसे बच्चे का आश्चर्यजनक वस्तु देखना, नाना प्रकार की खाने-पीने खेलने, अथवा उसके मस्तिष्क को हलचल करने वाले दृश्य उत्पन्न होना।

क्योंकि जितना बचपन होगा उतना ही बच्चे का दिमाग हलचल भरा होगा, चंचल होगा। बच्चे का चंचलता कोई दूर नहीं कर सकता।

बच्चे को कुछ खिलाओ कुछ और मांगेगा, कुछ भी खेलने को दे दो, दूसरा खिलौना देखते ही फिर मांगेगा। वह किसी विषय वस्तु में लगा हुआ है, जैसे ही उसका दूसरे वस्तुओं से संयग होता है, तो उस तरफ चल पड़ता। इस पर एक बात और है, यह जरूरी नहीं की संयोग उसी क्षण हुआ हो। यह निश्चित है कि बच्चे का स्मरण शक्ति कम होता है, परंतु सीखने का कला बहुत तेज होता है।

इसीलिए सनातन पद्धति में बच्चे को गुरुकुल भेज दिया जाता था, अथवा आज के समय बहुत ही उच्च स्तर के जो धनी हैं, वे अपने बच्चे को बोर्डिंग हॉस्टल में डाल देते हैं।

2 thoughts on “बच्चे का पढ़ने में मन नहीं लगता। Baccha padhaai kaise karen.

  1. ऐसे बच्चे क्या कभी नही बदलते? क्या इन्हे कोई भी वस्तु कभी भी बांध नही पाती?

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    1. ऐसे बच्चे के साथ कोशिश किया जा सकता है, की जो विषय वस्तु उनकी जरूरत की ना हो, उससे दूर रखने की कोशिश किया जाए। क्योंकि समय से पहले ज्यादा विषयों का संयोग बच्चे को भटकाने में मदद कर सकता है।

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