परमेश्वर ने हमें कुछ नहीं दिया, हम परमेश्वर को क्यों याद करें? हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

क्या भगवान ने कुछ नहीं दिया तो भगवान की भक्ति नहीं करना चाहिए। परमेश्वर ने हमें कुछ नहीं दिया इसलिए हम उस परमेश्वर को क्यों याद करें? ऐसा कहने वाले की भी संख्या कम नहीं है। इस प्रकार कहने वाले के लिए वह परमेश्वर चल कर आएगा और अपना चमत्कार दिखाएगा। परमेश्वर को जो याद करता है, जो संसार के सच्चाई को स्वीकार कर परमेश्वर की मर्जी में अपनी मर्जी मिला देता है, मानवता में सभी अच्छे को परमात्मा का निर्देश समझता है।

इन सभी मानव में संसार महामानव, वेदवक्ता, परमेश्वर का दूत, परमेश्वर का स्वरूप, ईश्वर का अंश, परमेश्वर का अवतार मानता है।

क्या लगता है क्या हम इतने महान हैं, कि वह परमेश्वर आएगा, और हमारे समक्ष अपना जादू दिखाएगा।

परमेश्वर हमें कभी नहीं कहता कि तुम मेरी भक्ति करो, वह परमेश्वर हमारे भक्ति का गुलाम नहीं।

परमेश्वर के लिए संसार में जितने भी नाम दिए गए हैं, वह परमेश्वर तो उन सभी नामों से अनंत गुना महान है।

सनातन साहित्य बार-बार यही कहता है, कि वह परमेश्वर का स्वरूप वास्तव में क्या है।

वह परमेश्वर सभी गतिमान स्वरूपों को गति देता है। शरीर से आत्मा को निकलते हुए किसी ने कभी नहीं देखा, पर यह सत्य है की आत्मा निकलता है। शरीर से आत्मा निकल कर कहीं नहीं जाता, वह तो कल भी संसार में था और आगे भी संसार में ही रहेगा।

शरीर और आत्मा का जो संयोग और वियोग है वह शक्ति परमेश्वर है।

उस परमेश्वर का कोई निश्चित रूप नहीं है, वह अपनी प्रकृति में प्रकृति के अनुसार से अपने रूप को धारण करता है, वास्तव में वह रूप से अनंत गुना महान है।



हम उस रहस्यमय परमेश्वर को याद करें अथवा न करें उस परमेश्वर को कोई फर्क नहीं पड़ता।

परंतु यहां एक विचार करने वाली बात है, समाज में सभी सम्मान पाने के लिए हर समय लालायित रहते हैं। सम्मान मिलता है तो आनंद महसूस करते हैं, और नहीं मिलता है तो क्रोध उत्पन्न होता है।

समाज एक दूसरे को सम्मान देता है और सम्मान लेता है यही समाज का नियम है।

आश्चर्य की बात है, जिसने हमको थोड़ा दिया, उसे तो हम मान दे सकते हैं, किंतु यह संपूर्ण ब्रह्मांड जो सबसे बड़ा रहस्य है। इसे बनाने वाले को मान नहीं दे सकते। जबकि वह संसार बनाने वाला, आप जिस भी नाम को मानते हो उसे मान देने में कंजूसी क्यों?

आपके उस परमेश्वर ने, इतनी अच्छी दुनिया बनाई, इतने सारे जीव बनाएं, और साथ में जीने के लिए नर और मादा से युक्त साझेदार साथी बनाया।

उस परमेश्वर के बारे में कितना भी कहा जाए कम है, वह परमेश्वर संसार में हर प्रकार की जाती, धर्म, समूह तथा संप्रदाय से कहीं महान है। वह परमेश्वर जीत और हार से दूर है, परमेश्वर का हमारे जय कहने से जय नहीं होगा, वास्तव में वह परमेश्वर अजय है।

2 thoughts on “ईश्वर की भक्ति क्यों।Bhagwan aur bhagt ka prem

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