नशा क्या है और उसे छोड़ने का उपाय क्या हो सकता है? हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

क्या नशा छोड़ा जा सकता है और नशा छोड़ने के लिए क्या करें।नशा शब्द बहुत ही भयानक है, उनके लिए जिन्होंने नशे के वजह से सजा के रूप में समय गुजारे हैं। नशा सिर्फ उस व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, जो नशा करता है।

नशा वह तत्व है, जो व्यक्ति नशे का आदी होता है, उसका तो बुरा होता है, साथ में उनके साथ उनके परिवार को भी अनेकों कठिनाइयों का सामना करना है।

बहुत ऐसी स्थिति में देखा गया है, एक नशा करने वाले से, वहां का समाज भी प्रभावित होता है। नशा इतना घातक कहा गया है, एक बार किसी को पकड़ ले तो मरते दम तक नहीं छोड़ता।

पहली बार तो व्यक्ति नशा के स्वयं करीब जाता है, तत्पश्चात नशा उस व्यक्ति के पीछे लग जाता है, व्यक्ति जहां – जहां जाता है नशा भी उसके साथ – साथ होता है।

पहले तो आनंद देता है उसके बाद धीरे धीरे आनंद ले लेता है। जब तक व्यक्ति के जीवन से संपूर्ण आनंद खत्म नहीं हो जाता, या यूं कहें नशा व्यक्ति को उस वक्त तक पकड़े रहता है, जब तक की व्यक्ति पूरी तरह से बर्बाद ना हो जाए।

अधिकांश नशा करने वाले व्यक्ति इस बात को भलीभांति समझते हैं, की नशा उन्हें दिन प्रतिदिन खा रहा है।

परंतु जब तक वे इस बात को समझते हैं, तब तक नशा उन्हें अपना गुलाम बना चुका होता है। नशा अनेकों प्रकार के हैं, सभी नशा हानिकारक बताए जाते हैं।

परंतु खास तौर पर वे नशा जिसके सेवन से मस्तिष्क का कंट्रोल खत्म हो जाए, नशा के पश्चात बुद्धि भ्रमित हो जाए ,ऐसा नशा कहीं ज्यादा हानिकारक बताया गया है।

किसी एक नशा का नाम क्या है, नशा अनगिनत है। कौन – सा नशा कितना हानिकारक है, यह बात भी समाज में प्रचलित है।



नशा को छोड़ने के लिए, सर्वप्रथम नशा को समझना पड़ेगा।

नशा के कार्य को समझना पड़ेगा। शरीर के अंदर नशा किस कदर फैला हुआ है, अथवा नशा शरीर के ऊपर किस प्रकार से हावी है, इस बात को भलीभांति समझना पड़ेगा। इसको समझने के लिए सबसे पहले इस बात को गहराई से सोचें, कि नशा कौन कर रहा है। मेरे कौन कहने का अर्थ, किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है।

नशा शरीर कर रहा है, शरीर का कोई अंग कर रहा है, या फिर बुद्धि कर रहा है।

बुद्धि नशा नहीं करता, बुद्धि को अच्छे बुरे का ज्ञान है। यह हो सकता है कि पहले बुद्धि आनंद के लिए नशा करने का इजाजत दिया हो। परंतु कुछ समय उपरांत बुद्धि के इज़ाजत नहीं देने पर भी, शरीर के अंग मजबूर करते हैं नशा लेने के लिए।

इस बात को एक बार और समझने की कोशिश करते हैं। सीधी तौर पर कहें तो नशा शरीर करता है, शरीर का अंग करता है।

इतिहास गवाह है, शरीर के अंग क्या क्या नहीं करवाते मानव से। नशा तो बहुत छोटी चीज है।



एक साधारण तरीके से समझने की कोशिश करें, एक आम इंसान जो नशा नहीं करता, वह यह भी रोज एक्सरसाइज करता हो, और जब उसे छोड़ता है, तो शरीर उस एक्सरसाइज का मांग करता है। यानी कि रोज एक्सरसाइज नहीं करने से, शरीर असंतुलित होने लगता है।

कोई व्यक्ति ब्लड प्रेशर का दवा नित्य खा रहा हो, और जब वह दो दिन नहीं खाएगा, तो उसका शरीर सिग्नल देने लगता है। अर्थात यह कहा जाए, कि यह सब शरीर की आवश्यकता है।

नशा भी ऐसा ही करता है, पहले थोड़े में इंसान को भ्रमित करता है, बाद में बहुत ज्यादा से भ्रमित करता है। पहले व्यक्ति को थोड़े नशा की जरूरत पड़ता है, बाद में व्यक्ति को ज्यादा नशा चाहिए।

पहले व्यक्ति नशा करता है, और बाद में नशा स्वयं ही व्यक्ति के अंदर नशा करता है।

जब व्यक्ति को नशा नहीं मिलता, शरीर असंतुलित होने लगता है, संतुलन देने के लिए नशा आवश्यक है।



नशा को छुड़ाने के लिए, कैसा नशा है, नशे का वजन कितना है, नशे का प्रभाव कितना है, इन सभी को तोलने के बाद व्यक्ति को उतने समय के लिए नशा से दूर रखना होगा।

यहां कुछ हफ्ते महीने नहीं, यह क्रिया कुछ साल का भी हो सकता है। नशा छोड़ने के साथ, व्यक्ति के अंदर नशा छोड़ने का आत्मविश्वास पैदा किया जाए, स्वयं से नशा छोड़ने का विश्वास दिलाया जाए, तो यह नशा छोड़ने में काफी हद तक सहायक हो सकता है।

यदि व्यक्ति शरीर के संतुलन के बाद, नशा छोड़ने के आत्मविश्वास के साथ चल रहा है, तो वह निश्चित तौर पर नशा को छोड़ पाएगा।

मैं फिर कहता हूं, कोई व्यक्ति ने यदि नशा को पकड़ा है, तो वह जरूर ही नशा को छोड़ देगा। अगर नशा ने व्यक्ति को पकड़ा है, तो उसे स्वयं से छोड़ना नामुमकिन है। बहुत बार ऐसा होता है कि नशा छोड़ने के बाद भी, व्यक्ति वापस उस नशा को पकड़ लेता है।

कुछ लोग कुछ दवा को खाकर नशा छोड़ते हैं, और वापस पकड़ लेते हैं।

ऐसी स्थिति में यह कहना गलत नहीं होगा, कि व्यक्ति का स्वयं से कोई इच्छा नहीं है नशा को छोड़ने के लिए। नशा को छोड़ने के बाद, पूरा जीवन उसे विश्वास में रहना होगा, कि वह निश्चित तौर पर नशा को छोड़ देगा। वह मर जाएगा परंतु नशा को जीतने नहीं देगा, वह निश्चित तौर पर नशा के ऊपर काबू पाएगा।

उसे यह समझ कर रखना होगा, वह किसी नशे का गुलाम नहीं हो सकता, उसे अपनी बुद्धि से नशे को गुलाम बना कर रखना होगा, नशा मुट्ठी में मौजूद हो, और वह नशा को हिलने नहीं देगा।

अपनी मुट्ठी के अंदर ही नशा को सदैव के लिए मार देगा। नशा सब छोड़ सकते हैं, यदि वे स्वयं से निश्चय कर लें, किसी के कहने का इंतजार न करें, स्वयं से स्वयं को निश्चित करें कि हमें नशा मुक्त होना है। निश्चित तौर हर व्यक्ति पर नशा को जीत लेगा, अंदर से कहेगा मैं नशा से लड़ रहा हूं, बाहर लोग देखेंगे कि वह नशा को जीत चुका है।

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