प्रेम में साथी की भावना महत्वपूर्ण होता है। हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

प्रेम में अपने प्रेमी साथी का भावना महत्वपूर्ण क्यों।प्रेम का शुरुआत, आकर्षण अपने प्रेमी के बारे में महान दर्शन सहायक होता है। ऐसी स्थिति में आकर्षण और दर्शन यदि वास्तविक ना हो तो प्रेम का स्थिति नीचे आ जाता है। इसीलिए कहते हैं प्रेम वस्तु के ऊपर आश्रित रहने वाला तत्व नहीं है। शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति करना, यह व्यक्तिगत आवश्यकता है। इसमें प्रेमी और प्रेमिका दोनों का बराबर योगदान रहता है। किसी परिस्थिति में कोई एक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम नहीं होता, उस स्थिति में दूसरा पक्ष का आवश्यकता कहीं और केंद्र की तलाश करने लग जाता है। यही वास्तव में दो प्रेमियों के बीच दूरी का कारण बनता है।



यह कोई कहे की तुम मेरे से प्रेम करो, पूरी तरह से तुम मेरे ऊपर आश्रित रहो, और मैं साथ में किसी और के साथ आश्रित रहूंगा, ऐसा नहीं हो सकता। इस प्रकार का प्रेम पारिवारिक कलह का कारण बनता है। संसार में यदि समाज को आपस में साथ रहने के लिए, एक दूसरे के इच्छाओं का पूर्ति करना, आवश्यकताओं की पूर्ति करना आवश्यक है ,यह दोनों पक्ष का जिम्मेवारी बनता है।

5 thoughts on “प्रेमी का भावना महत्वपूर्ण क्यों। Premi ka Dil kya sochta hai.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s