परमेश्वर का वास्तविक स्वरूप क्या है? हिंदू धर्म दर्शन। सनातन धर्म में परमेश्वर का स्वरूप।

हिंदू धर्म में परमात्मा का वास्तविक रूप क्या है?आदिकाल से महापुरुषों ने अनेक प्रकार से अपनी अपनी ताकत लगाई, कोशिश की उस परमात्मा के पास पहुंचने की, बहुत लोग इसमें सफल भी हुए, और अनेक महात्माओं को, अथवा महापुरुषों को जो ज्ञात हुआ। सबने अनेक प्रकार से भांति भांति से प्रकट की किए। परमात्मा के स्वरूप का विस्तार किए। अपना अनुभव आने वाले साधकों के लिए प्रस्तुत कर गए।

वेद कहता है, शास्त्र कहता है, पुराण कहता है, ऋषि महर्षि कह गए, श्रीमद्भागवत गीता कहतीं हैं।

परमेश्वर बिना आकार वाला, उसका कोई रूप नहीं, वो सब में हैं और सब उसमें है। उन्हें स्त्री है ना पुरुष है, को स्वयं सब शक्तियों का शक्ति स्रोत है,और एक उसी की शक्ति से संपूर्ण जगत शक्तिमान है। वह जगत के कण-कण में विराजमान हैं और और ब्रह्मांड का हर कन उसमें स्थित है।



संसार में जो कुछ भी दृश्य मान हैं, उन सभी स्वरूपों के पीछे जो शक्ति कार्य कर रही है वही परमेश्वर है।

शरीर के बिना आत्मा का कोई अस्तित्व नहीं, और आत्मा के बिना शरीर का कोई अस्तित्व नहीं। जिस प्रकार एक शरीर के अंदर अनगिनत आत्माएं रहता है, उसी प्रकार परमेश्वर के अंदर सारी आत्माएं रहती है। शरीर के अंदर का जीव, हमारी स्वरूप को नहीं देख सकता, वह हमारे शरीर के ऊपर आश्रित है। व्यक्ति के शरीर के साथ उन सभी जीवों का स्वत ही अंत हो जाता है।

One thought on “ईश्वर का वास्तविक रूप। Parmeshwar ka han pahchan.

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