जनता अपना दर्द किसे सुनाएं- बकवास। हिंदू धर्म। सनातन धर्म।

जनता का दर्द कौन समझे!नेताओं के द्वारा मूर्ख वोटर कहा जाने वाला जनता अपना दर्द किसे सुनाएं?


नेता अभिनेता राजनेता सब सिर्फ अपने लिए जीते हैं, जनता के लिए कौन जीता है। ह्यूमन राइट्स, समाज कल्याण सेवा, और ना जाने कितनी सेवाएं देश में चल रही है, परंतु उसकी वास्तविकता यही है कि सबसे अपनी सेवा कर रहे हैं जनता की क्या पड़ी है, और क्यों पड़ी है ?
कहते हैं‌‌  ”अपना काम बनता ,भाड़ में जाए जनता ।”
जनता रोज नित्य नए आस लगाती है, पर उसका प्यास कभी बुझता नहीं। जनता  ”हर चाय दुकान पर, हर सैलून में, सभी नुक्कड़ों
पर पर चर्चाएं तो बहुत करता है परंतु सभी को बकवास मान लिया जाता है।


देश में एक बहुत बड़ा आंदोलन चला  था, श्री हजारे आंदोलन जन सेवा केंद्र। हजारे जी तो हजारे जी हीं रह गए। ”आंदोलन जन सेवा केंद्र” एक नए रूप आम आदमी जनसेवा केंद्र के रूप में ले लिया। आज सिर्फ सेवा का नाम लेकर मेवा खाया जा रहा है। फांग्रेस जन सेवा केंद्र, अपने आप को देश का सबसे बड़ा जनता सेवक समझती है और बार-बार जनता को एहसास दिलाया जाता है कि देश की आजादी उन्होंने दिलाई। यानी कि आजादी सिर्फ उन चंद नेताओं के बदौलत पाई, ऐसा लगता है मानो आजादी में आम जनता का कोई रोल ही नहीं था। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उनका ही जन्म सिद्ध अधिकार हो और सिर्फ उन्हें ही मलाई खाने का हक हो। एक है भारत जन सेवा केंद्र है, सब अपने आप को पाक साफ बताते है मानो सब के सब ही दूध के धुले हो। देश में इस प्रकार की अनेकों जन सेवा केंद्र चल रहे हैं। सभी किसी न किसी विषय के ठेकेदार भी बने हुए, और उनके शब्दों में ऐसा लगता है कि मानो उस विषय पर उसका ही जन्मसिद्ध अधिकार हो।


”जनता बकवास” जनमानस यूं ही मानो बकवास करते रहेंगे और जन सेवा केंद्र यूं ही चला करते रहेंगे। एक समय था जब एक व्यक्ति अपना काम छोड़कर समाज सेवा में लगा रहता था तो उसको लोग समाजसेवी, तथा नेता कहा करते थे । परंतु अब जो व्यक्ति दूसरों पर प्रभुत्व जमा सकें, जिससे आम जनता किसी प्रकार भी बहस करने से पीछे हटे, जो इलेक्शन से पहले स्वयं ही जनता दरबार में जाता हो, और बाद में कभी भी जनता के लिए दरबार ना लगाता हो तथा जिसे राजनीति, अथवा यूं कहे नेतागिरी बापदादा के द्वारा विरासत में मिला वहीं अपने आप को सबसे बड़ा समाजसेवी बताता है। उन बड़े समाज सेवकों के जो अपने खास फिल्डर है उन्हें अपना भगवान मानते हैं, गलती उन फील्डरों नहीं , दुनिया में सबसे बड़ा एक जादू है, जिस जादू से सब वाकिफ हैं। उस जादू को सबने कहीं थोड़ा या ज्यादा किया है अथवा देखा है। उस जादू का बहुत प्यारा नाम है ”पैसा फेक तमाशा देख।”
जनता बकवास, जनता की प्यास कल भी अधूरी था और आगे भी अधूरा ही रहेगा। जनता की सही बातों को भी बकवास नाम दे दिया जाएगा, जनसेवा केंद्रों की नजर में जनता की बातें  ”जनता तो यूं ही बकवास करती रहेगी। हमारा काम बनता और भाड़ में जाए जनता।”

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