मृत्यु एक कठिन विषय है। यह एक संत की वाणी है श्री एकादश सेवक जी महाराज। मैंने उनसे मृत्यु के ऊपर चर्चा किया था। उनके द्वारा बताए हुए कुछ अंश यहां प्रस्तुत है।

मौत के बाद क्या होता है।

संसार में मानव की मृत्यु के बाद क्या होता है? वास्तविकता तो हर समय वास्तविक रहता है। किसी के बोलने से अथवा सोच लेने से वास्तविकता नहीं बदलता। प्राचीन इतिहास में एक से बड़े एक महान आत्मा हुए और उन्होंने मौत के बाद का वक्तव्य बताया। सभी के अपने अपने दृष्टिकोण होते हैं, आपका भी एक अपना दृष्टिकोण होगा।व्यक्ति का मृत्यु के बाद क्या होता है?



जीवन का अंत मौत है, मौत के बाद क्या होता है, समाज में अनेकों प्रकार के दृष्टिकोण हैं, साथ-साथ अनेकों भ्रांतियां भी है। संसार में अनेकों धर्म के अनुयाई अपने अपने अनुसार से मौत के बाद का चर्चा करते हैं।

अधिकांश चर्चा में, मौत के बाद की बात, कल्पनाओं में कही गई है। आज तक मौत को गले लगाने वाला जाकर वापस आया हो, ऐसा कहीं प्रमाण नहीं मिलता। अथवा एक तरीके से यूं कहें प्रकृति मौत तो देती है, वापस उसका सृजन नए तरीके से करती है। वास्तव में मौत का रास्ता एक तरफा होता है, व्यक्ति मौत को गले तो लगा सकता है, परंतु मौत से गले नहीं छुड़ा सकता।



मौत इस प्रकृति का कड़वा सच है, विज्ञान कहता है, समस्त शास्त्र भी यही कहते हैं, जो जन्मा है वह मरेगा, यदि शरीर के अंदर बालकपन है, युवावस्था है, वृद्धावस्था है तो इस शरीर का अंत निश्चित है। सभीं प्रकृति में एक निश्चित अवधि के उपरांत अपना शरीर छोड़ देते हैं।


इसके साथ यह भी एक कड़वा सत्य है, मौत अथवा मृत्यु कोई नहीं चाहता। सभीं जीना चाहते हैं, कोई कितना भी खुश हो जब वह ऐसा सुनता है, अथवा समझता है की मृत्यु उसके अत्यंत निकट है, तभी उसके होश उड़ जाते हैं। अक्सर देखने में आया है बिस्तर पर पड़ा हुआ व्यक्ति यह समझ चुका होता है कि अब मैं उठ कर खड़ा नहीं होऊंगा, उसके अंदर अपने द्वारा किए गए कर्मों का विवरण सामने आने लगता है।

जिसने पाप किया हो उसके लिए पापा आत्मा आते हैं, और जिन्होंने पुण्य कर्म किया है उसके ख्याल में देवात्मा आते हैं।

मौत की चर्चा कोई नहीं चाहता ,परमेश्वर सत्य है, सभी को पता है मौत भी सत्य है। निश्चित तौर पर मौत पर चर्चा होना चाहिए, अपने मौत का चिंतन होना चाहिए, जबकि व्यक्ति मौत से दूर भागता है, मौत का नाम सुनने से भी दूर भागता है। मृत्यु जो शब्द है वह परमेश्वर के सदृश सत्य है, “सनातन सत्य” है।



सवाल उठता है मौत से डरना क्यों? मौत से किस लिए डरें? जीवन के उपरांत मौत हमें कहां लेकर जाने वाला है?


जबकि मौत के बाद क्या होता है उसका वास्तविकता किसी के पास नहीं है। यदि अपनों से दूर होने का डर है, तो आप निश्चित सोच लो, कि हर अपना एक निश्चित समय के बाद अपने आप हीं आपसे दूर हो जाता है।

सनातन सत्य यह नहीं कहता कि जाओ और मौत को गले लगा लो, नहीं …कदापि नहीं! सनातन साहित्य बार-बार एक ही बात दोहराता है, मानव तन अपने स्वत: के कल्याण के लिए मिला है।

मृत्यु से पहले अपना कल्याण कर लो, अथवा सीधे तौर पर सुख और दुख की भावना से मुक्त हो जाओ। पाने और खोने, अपना और पराया, दोस्त और दुश्मन सबसे दूर अपने आप को शांत कर लो। शरीर की मृत्यु से पहले, अपने द्वारा बनाए हुए भावना को त्याग दो, हर दिन बेचैन करने वाले स्वभाव से मुक्त हो जाओ। जिस दिन संसार रूपी भावना से मुक्त हो जाओगे, उसी दिन अमर हो जाओगे।



उसके उपरांत मौत तो सामने होगा परंतु किसी प्रकार का भय नहीं होगा, पाप आत्मा भावनाओं में आकर बेचैन नहीं करेंगे।

यह वास्तविक है, हमारे द्वारा बनाया हुआ खाना भी एक निश्चित समय बाद बेकार हो जाता है। अपने ही बच्चे वयस्क होने के बाद अपनी दुनिया में खो जाते हैं।

मानव तन छूटने से पहले आखरी सांस तक अपनी भावनाओं से मुक्ति का प्रयास करें “अपने परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करें, हे ईश्वर? मुझे शक्ति दे! प्रकृति की तरह मैं भी नाशवान हूं, मेरा नाश होने से पहले, मैं पूरी तरह से तेरे समर्पण हो जाऊं। मौत के बाद क्या होगा, इस दर्द सदा के लिए मुक्त हो जाऊं। हे जगत के ईश्वर मेरे ऊपर कल्याण कर।”

प्रकृति सबके लिए समान रूप से व्यवहार करती है, परमेश्वर भी सबके साथ समान रूप से व्यवहार करने वाला है, इस विशाल ब्रह्मांड में परमेश्वर का नाम ही प्रमुख रूप से हर व्यक्ति का सहारा है, यहां जो अपने है कल किसी और के थे, आने वाले समय में किसी और के हो जाएंगे। परमेश्वर कल भी अपना था, आज भी अपना है और मौत के बाद जहां जाएंगे वहां परमेश्वर अपना हीं रहने वाला है।

One thought on “मृत्यु के बाद क्या होता है? Marne ke bad kya.Ekadash Sevak

  1. जीवन धरा पर स्थाई नही
    समय स्थिर सबका यहाँ
    कब,किसका समय
    हो जाए पूरा
    कोई बता सके ना कभी यहाँ।।

    फिर भी भागे दौड़े,ढूंढे
    स्वर्ग जिसे हम कहे यहाँ
    मरे बाद ही मिले स्वर्ग सदा
    फिर भी मरने से सब डरे यहाँ।।
    🙏

    कभी भी भागे दौड़े यारो
    पकड़े डोर जीवन की धरा यहाँ

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