भारत तीर्थ दर्शन।सनातन महातीर्थ ऋषिकेश। अतुल्य भारत दर्शन। Incredible India.
“ऋषिकेश” अर्थात ऋषियों के रहने का एक बड़ा स्थल। ऋषिकेश-उत्तराखंड राज्य में स्थित महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल ।।हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थलों में एक,देवभूमि उत्तराखंड के चार धाम का प्रवेश द्वार। कहते हैं समुंद्र मंथन से निकले विष को यही पास के नीलकंठ में भगवान शंकर ने पिया था।

ऋषिकेश प्राचीन काल से ऋषियों का उत्तम निवास स्थान रहा है।

यहां पर अनेक सिद्ध महात्माओं ने तपस्या की है, आज भी संत महात्मा यहां पर एकांतवास करते हैं, तथा अपनी साधना में लीन रहते हैं। देवभूमि भारत में अपना एक खास महत्व रखता है, उसी प्रकार देवभूमि में ऋषिकेश का अपना ही एक महत्व है।

ऋषिकेश को यदि एक वाक्य में व्याख्या करने की कोशिश किया जाए, तो कहां जाएगा “ऋषियों का शहर।” 

निरंतर तेज हवाओं का गूंज, साथ में कल कल करती मां गंगा की मनोरम धारा। मानो ऐसा लगता है, जैसे श्री गंगा सभी आगंतुकों का स्वागत कर रही हो।

वैसे तो संपूर्ण ऋषिकेश अपने आप में खास है।

उनमें विशेष-
“श्री गंगा” गंगा जी के दोनों तरफ मनोरम ऋषिकेश, स्नान ध्यान पूजन के लिए घाट बने हुए। आप जब कभी भी, किसी भी मौसम में आप आओ, सैकड़ों की संख्या में ऋषि मुनि, भक्त मिल जाएंगे।

विशाल भारत में गंगा जी का विस्तार बहुत बड़ा है, और गंगा जी हर जगह खास है।

श्री गंगोत्री से लेकर बंगाल के नंदनवन तक श्री गंगा के अनेकों रूप हैं। गंगोत्री के रूप का वर्णन संपूर्णता नहीं हो सकता। सभी व्यक्ति गंगोत्री जा भी नहीं पाते परंतु ऋषिकेश किसी भी सामान्य भक्तों के लिए आना बहुत ही आसान है।

गगनचुंबी पहाड़ों के बीच से निकलती गंगा का स्वरूप बहुत ही आकर्षक है।

गंगा जी के दोनों तरफ बड़े-बड़े आश्रम, और अनेकों विशाल मंदिर गंगा जी को और भी आकर्षक बनाते हैं।



यदि संध्या की बात करें, तो यहां संध्या आरती बहुत ही अनुपम होता है। दोनों तरफ एक ही समय में आरती शुरू होता है।

” गंगा आरती ” परमार्थ निकेतन, गीता भवन एवं अनेकों  आश्रम तथा भक्तों के द्वारा श्री गंगा आरती का आयोजन नित्य होता है।

यदि हम आरती के दृश्य की बात करें तो उस क्षण ऐसा लगता है मानो यही असली का भारत है। प्राचीन भारत , ऋषियों का भारत, एक ऐसा भारत जहां कोने कोने में सनातन संस्कृति बसता हो।

यदि पर्यटन की दृष्टि से कहा जाए, तो बाहर से आए हुए पर्यटक अथवा भक्तों के लिए एक दिन में ऋषिकेश पूर्णतया घूमना संभव न होगा।

यहां पर देखने के लिए “काली कमली वाले का आश्रम, परमार्थ निकेतन, गीता भवन, श्रीराम तप:स्थल, राम झूला, कैलाश आश्रम,लक्ष्मण झूला, एक नया ब्रिज का भी निर्माण हो चुका है जो देखने के लिए बहुत ही खास है।

त्रिवेणी घाट यहां नित्य कोई ना कोई अनुष्ठान, कथा होते हुए एवं तपस्वी दर्शन के लिए मिल जाएंगे।


यदि महत्व की बात करें, तो धरती पर मौजूद सभी तीर्थ अपने आप में खास है, किसी से किसी का तुलना नहीं है, परंतु लेखक अथवा वक्ता के पास तुलना के सिवा कोई रास्ता नहीं होता, अपने शब्द को दर्शाने के लिए।

सभी तीर्थों में कुछ ऐसे भी तत्व होते हैं, जिनका तीर्थ को लेकर जीविका चलता है, और वे उसके लिए अपनी हदें कभी-कभी पार कर जाते हैं, और उनकों लेकर ही तीर्थ दर्शन का परिहास होता है।

तीर्थ की विशेष छवि को लेकर कोई व्यक्ति दर्शन को जाता है, और वहां कुछ और पाता है, तो उसके भावनाओं को ठेस लगता है, उसके श्रद्धा का परिहास होता है।

सनातन पद्धति का परिहास होता है, जिसका चिंतन सभीं सनातनी यों को करना चाहिए।

यदि हम ऋषिकेश की बात करें, तो यहां पर ऐसा वाकया बहुत कम देखने को मिलेगा। ऋषिकेश आज भी अपने प्राचीनतम दर्शन को दर्शाता है।

ऋषिकेश आने वाले प्रत्येक भक्तों के भावनाओं को श्री गंगा और यहां का दर्शन पवित्र करती है।

यदि धार्मिक दृष्टि से कहा जाए तो संपूर्ण उत्तराखंड एक तीर्थ है, और सभी को इसका दर्शन करना चाहिए। यदि पहाड़ों के अंदर जाना संभव ना हो, तो हरिद्वार आए और साथ में श्री ऋषिकेश का दर्शन करें। मां श्री गंगा का दिव्य दर्शन सभी भक्तों का कल्याण करें।

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