धरती पर अनेक देश अनेक धर्म के व्यक्ति निवास करते हैं।भारत अपनी संस्कृति को लेकर अतुलनीय रहा है।

भारतीय पुरुषों का कौशल अपने आप में बहुत ही उत्तम है। भारत उनमें बिल्कुल अलग है,परंतु भारत को भी सब अपने अनुसार से तुलना करते हैं। भारत में ऐसा क्या है जो इसे खास बनाता है। यहां की सबसे बड़ी खूबसूरती है की अनेक धर्म वाले मिलकर एक साथ रहते हैं। जबकि अनेकों देश में इस प्रकार नहीं होता। सब अपने को बेहतर बताते हैं और अपने को बेहतर बताना भी चाहिए, वे अपनी जगह पर सही हैं।

भारत का अपना एक सनातन इतिहास रहा है, यहां जो भी हैं जिस धर्म के व्यक्ति हैं सबके अंदर एक हिंद रूपी मानवता का अंश है।

जो प्रायः दूसरे देशों में नहीं पाया जाता। और इसका मूल है भारत की सनातन संस्कृति जो अपने अंदर सबको स्थान देता है ।


भारत अपने अंदर क्यों स्थान देता है दूसरे को। उसका मूल कारण है सनातन सिद्धांत। भारत से अलग हुए देशों ने यह सिद्धांत क्यों नहीं अपनाया जग परिचित है कि उन्होंने सनातन संस्कृति को छोड़ दिया। उन्होंने उस संस्कृति को अपनाया जिसमें पढ़ाया को काफिर की संज्ञा दी जाती है।

सनातन धर्म में भी अच्छे बुरे सब का जिक्र है। देवता का जिक्र है तो राक्षस शैतान का भी जिक्र है। परंतु सनातन सिद्धांत कहता है कि उस देवता अथवा राक्षस का निर्माण भी उस परमेश्वर ने किया है।

सब का निर्माण कर भगवान ही और सब का भरण पोषण भी वही करता है। उसके मन में भेद नहीं है उसके अनुसार से सब अपने आचरण के अनुसार से पाते हैं अथवा होते हैं।

भारत में अनेक छोटे बड़े महान धर्म है, यदि देखा जाए तो उनकी पूरी सिद्धांत सनातन धर्म के ऊपर टिका हुआ है। इसीलिए उनके धर्म में सब का सम्मान है अथवा वे सबको सम्मान करते हैं।

यह भारत की विशेष खूबसूरती है।इंसान अपने आप को इंसान कहता है और उसके अंदर इंसानियत ना हो फिर इंसान कहलाने का क्या मतलब।


धरती पर अनेक महान आत्माएं आई उन्होंने परमेश्वर का मार्ग दिखलाया, इंसानियत को दर्शाने की कोशिश की, परंतु अफसोस दुनिया ने उस परमेश्वर को प्रधानता देने के बजाय उस व्यक्ति को परमेश्वर बना दिया।

परमेश्वर ने अपनी जाति नहीं बताई, अपना धर्म नहीं बताया।परंतु दुनिया ने उस परमेश्वर को भी एक जाति में बांध दिया एक धर्म में बांध दिया। यह दुनिया की इंसानियत का स्वरूप।

वास्तव में परमात्मा जाति धर्म से कहीं ऊपर है,वह अतुलनीय है उसका किसी से तुलना नहीं हो सकता।

परमेश्वर एक वही सबसे ऊपर है, वह सब के करीब है। उसके अंदर कोई भेदभाव नहीं है।
और यही सनातन सिद्धांत भारत को अतुलनीय बनाता है। भारत की तुलना, भारत की संस्कृति की तुलना, भारत हर एक इंसान अतुलनीय है।

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